इटारसी रेलवे स्टेशन पर CJP कार्यकर्ताओं और AISF छात्रों को पुलिस ने हिरासत में लिया
घटना का विवरण
10 अक्टूबर को मध्य प्रदेश के इटारसी रेलवे स्टेशन पर पुलिस ने सिटीजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस (CJP) के 15 कार्यकर्ताओं को ट्रेन से उतार लिया। इनमें 3 युवतियां और 12 युवक शामिल थे। ये कार्यकर्ता दिल्ली के जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और चुनाव संबंधी मुद्दों को लेकर आयोजित प्रदर्शन में भाग लेने जा रहे थे। कार्यकर्ताओं के अनुसार वे महाराष्ट्र से ट्रेन में सवार हुए थे, हालांकि सटीक बोर्डिंग स्टेशन स्पष्ट नहीं है।
CJP की एक युवती कार्यकर्ता ने आरोप लगाया कि ट्रेन में पुलिसकर्मियों ने उनके साथ बदसलूकी की और कपड़े खींचे। उन्होंने यह भी कहा कि मौके पर कोई महिला पुलिसकर्मी मौजूद नहीं थी। कार्यकर्ताओं ने दावा किया कि पुलिस ने उन्हें डराना-धमकाना शुरू कर दिया और उन्हें नहीं बताया कि उन्हें कहां ले जाया जा रहा है।
प्रमुख बयान और प्रतिक्रियाएं
CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा, "इमरजेंसी घोषित क्यों नहीं कर देते।" CJP प्रवक्ता आशुतोष रांका ने बयान दिया, "क्या मोदी आधिकारिक तौर पर इमरजेंसी लागू करने से पहले कोई ‘नेट प्रैक्टिस’ कर रहे हैं।" ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (AISF) के राष्ट्रीय अध्यक्ष विराज दिवांग ने बताया कि पुणे से दिल्ली जंतर-मंतर जा रहे AISF के छात्रों को भी इटारसी में हिरासत में लिया गया है। उन्होंने कहा कि छात्रों को कुछ देर पहले हिरासत में लिया गया और वे यह पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि छात्रों को कहां ले जाया गया और किस आधार पर हिरासत में लिया गया।
हिरासत में लिए गए कार्यकर्ताओं ने स्टेशन पर ही नारेबाजी की। उन्होंने "ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दो" और "मोदी मुर्दाबाद" के नारे लगाए तथा कहा, "हम तुम्हारी तानाशाही से नहीं डरेंगे।" कार्यकर्ताओं ने यह भी कहा कि वे SIR रद्द करने और अपने अधिकारों की मांग को लेकर दिल्ली जा रहे थे। उनका मानना है कि देश में गलत होने पर आवाज उठाना जरूरी है, लेकिन दिल्ली पहुंचने से पहले ही पुलिस ने उन्हें रोक दिया।
मीडिया ने मामले पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अभिषेक राजन से बात करने का प्रयास किया, लेकिन वे जवाब देने से बचते रहे। पुलिस की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
Adarsh Chaurasiya