राहुल के सामने छात्रों ने पुलिस ज्यादती के आरोप लगाए, सीईसी इस्तीफे की मांग

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राहुल के सामने छात्रों ने पुलिस ज्यादती के आरोप लगाए, सीईसी इस्तीफे की मांग

राहुल गांधी के समक्ष छात्रों ने पुलिस ज्यादती के आरोप लगाए, मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग दोहराई

प्रेस कॉन्फ्रेंस में छात्रों ने सुनाई आपबीती

एसआईआर और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने बुधवार को राहुल गांधी के सामने दिल्ली पुलिस पर मारपीट और हिरासत में ज्यादती करने के आरोप लगाए। प्रेस कॉन्फ्रेंस में एनएसयूआई के छात्र, कार्यकर्ता और कंटेंट क्रिएटर्स ने अपने साथ हुई घटनाएं बताईं। एक छात्रा ने प्राइवेट पार्ट पर लात मारने का आरोप लगाया, जबकि दिल्ली यूनिवर्सिटी की छात्रा अदिरा ने दावा किया कि पुलिस की पिटाई से उसके एक कान से सुनने की क्षमता चली गई। एक अन्य प्रदर्शनकारी ने आरोप लगाया कि पुलिस आरएसएस और भाजपा से जुड़े लोगों के कहने पर प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले रही थी।

राहुल गांधी ने छात्रों से घटनाओं के वीडियो और दूसरे सबूत सुरक्षित रखने को कहा। उन्होंने कहा कि इन सबूतों के आधार पर पुलिसकर्मियों से लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त तक, जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जाएगी। कांग्रेस समेत विपक्ष एक अक्टूबर से लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। अब तक पांच प्रदर्शन किए जा चुके हैं। राहुल गांधी ने कहा, 'ये हिंदुस्तान है, अमित शाह जी यहां कोई हिंदू-मुस्लिम नहीं है, इनकी कोई जात नहीं है। आप इस आवाज के सामने खड़े नहीं हो सकते। स्टूडेंट्स से कहना चाहता हूं। आप वीडियो बनाकर रखिए। उन सबूतों को हम रखेंगे।' राहुल ने कहा कि जब सब खत्म होगा तो इन सबूतों के आधार पर सबको सजा मिलेगी। चाहे पुलिस वाले हों या ज्ञानेश कुमार हों। ये देश की आवाज हैं। इस आवाज को दबाने की कोशिश हो रही है।

पीड़ित छात्रों के विस्तृत बयान और राहुल का ज्ञानेश कुमार को संदेश

राहुल गांधी ने कहा, 'केरल की अदिरा की एक कान से सुनने की क्षमता चली गई है। उस कान पर चोट लगने के कारण वह एक कान से सुन नहीं पा रही है। अब उसे सुनाई नहीं देता। पिछली बार मैंने आपको एक लड़का दिखाया था, जिसकी आंखों की रोशनी चली गई थी। अब इस लड़की के एक कान से सुनने की क्षमता चली गई है।' अदिरा ने बताया, 'मैं केरल की रहने वाली हूं और दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ती हूं। कल जब हमें हिरासत में लिया गया, तब बस में कोई महिला पुलिसकर्मी नहीं थी। इसलिए मैंने सिर्फ इतना पूछा कि महिला पुलिस अधिकारी या महिला कांस्टेबल कहां है? अगर वे हमें हिरासत में लेना चाहते हैं, तो बस में कम से कम एक महिला कांस्टेबल का मौजूद होना जरूरी है।' इसके बाद बस आगे बढ़ी और कनॉट प्लेस पुलिस स्टेशन के सामने जाकर रुकी। वहां पुलिसकर्मियों ने मेरे पूरे गाल पर लगातार मारा। इसकी वजह से मेरी आंख में चोट आई है और कान को भी नुकसान पहुंचा है। अदिरा को पुलिस ने घसीटकर हिरासत में लिया।

एनएसयूआई से जुड़ी ऋतु बराला ने कहा, 'कल एनएसयूआई के सभी कार्यकर्ता शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे थे। इसी दौरान हमें तीन बसों में हिरासत में लिया गया। हर बस में हमारे करीब 30-40 साथी थे। हमारी बस में दो लड़कियां और 20-30 अन्य एनएसयूआई कार्यकर्ता थे। बस में चंचल यादव नाम की एक महिला पुलिस कांस्टेबल थी। हिरासत में लिए जाने के बाद हमने गेट से दोबारा बस से बाहर निकलने और प्रदर्शन का नेतृत्व जारी रखने की कोशिश की।' 13 अक्टूबर को ऋतु और महिला पुलिसकर्मियों के बीच झड़प की तीन तस्वीरें सामने आईं। प्रदर्शनकारी रमित ने कहा, 'मैं कंटेंट क्रिएटर हूं, मुझे 11 अक्तूबर को आरएसएस और भाजपा के गुंडों के बोलने के बाद हिरासत में लिया गया। उनके पास डंडे थे। पुलिस ने उनकी बात सुनकर लोगों को हिरासत में लिया और बुरी तरह हमें पीटा। उनका फोन छीना। वहां कोई फीमेल पुलिस ऑफिसर्स भी नहीं थीं। उनके डंडे का रिस्पॉन्स डंडा ही है।' रमित 11 अक्टूबर को कनॉट प्लेस में प्रदर्शन को कवर कर रहे थे। प्रदर्शनकारी धर्मेंद्र ने बताया, 'मुझे बहुत ज्यादा मारा, अंकित कसाना नाम के पुलिस वाले ने कहा कि कितने लीडर आएंगे तेरे साथ। तुझे बचाने कोई नहीं आएगा। तुम पैसे लेकर आते हो। उन्होंने लात-घूंसे थप्पड़ मारे। मुझे डर लग रहा था लेकिन अब मुझे गोली भी मारेंगे तो गोली खा लूंगा।' राहुल गांधी ने सोमवार को दावा किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने उनसे बात करने की कई बार कोशिश की है। दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक सवाल के जवाब में राहुल बोले- हां उनके मैसेज आते हैं। ज्ञानेश कुमार यह प्रेस कॉन्फ्रेंस देख रहे हैं। मैं उनसे कहना चाहता हूं आप अपराधी नहीं है, आपसे बस करवाया गया है। सबसे आसान रास्ता है कि इस्तीफा दो और रास्ते से हट जाओ।

Sachin Saxena