भागवत का विजयादशमी संबोधन: भारत तोड़ने की साजिश और एकता का मंत्र

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भागवत का विजयादशमी संबोधन: भारत तोड़ने की साजिश और एकता का मंत्र

मोहन भागवत का विजयादशमी संबोधन: भारत की एकता और विकास पर जोर

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने मंगलवार को नागपुर स्थित संघ मुख्यालय में आयोजित विजयादशमी उत्सव में संबोधन दिया। इस अवसर पर उन्होंने शस्त्र पूजन किया। संघ प्रति वर्ष विजयादशमी पर अपना स्थापना दिवस मनाता है; 1925 में इसी दिन संघ की स्थापना हुई थी। कार्यक्रम में पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और उनकी पत्नी डॉ. सुदेश धनखड़, इजराइल के काउंसल जनरल यानिव रेवाच, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी उपस्थित रहे।

प्रमुख घोषणाएं और चेतावनियां

भागवत ने कहा कि भारत में भी बांग्लादेश और फ्रांस जैसे हालात बनाने की कोशिश हो रही है। दुनिया में ऐसी शक्तियां हैं जो भारत को दबाना चाहती हैं; उनका मकसद सत्ता परिवर्तन कर हालात सुधारना नहीं, बल्कि अपने पिट्ठू बैठाना है। कुछ लोग भारत और हिंदू समाज को तोड़ना चाहते हैं और उन्हें ऐसे नेताओं का भी समर्थन मिलता है। उन्होंने पांच बड़ी बातें रखीं: (1) आंदोलन का उद्देश्य समाधान हो, समाज में विभाजन नहीं; समस्याओं के कारण आंदोलन होते हैं लेकिन उनका उद्देश्य समाधान होना चाहिए, न कि द्वेष और विभाजन पैदा करना। कई बार आंदोलनों को दूसरे उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया जाता है और वे राजनीति का साधन बन जाते हैं। समाज और देश को सिर्फ नेता नहीं चलाते, बल्कि समाज की सक्रियता से भी समस्याओं का समाधान होता है। (2) एकता के सूत्र में बंधे रहेंगे तो कोई हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकता; दुनिया में ऐसी शक्तियां हैं जो भारत को दबाना चाहती हैं, उनके प्रभाव में आकर उत्तेजित नहीं होना चाहिए। लॉर्ड कर्जन ने हिंदू-मुस्लिम आधार पर बंगाल का विभाजन किया था जिसे चार साल बाद वापस लेना पड़ा, लेकिन 1947 में देश का विभाजन नहीं रुक सका क्योंकि लोगों के मन में आ गया था कि जो अलग दिखते हैं वे अलग ही हैं। तुष्टिकरण के कारण तोड़ने वाली मानसिकता को बढ़ावा मिला। (3) हमारे पूर्वज एक, सबको साथ लेकर चलना जरूरी; सभी के पूर्वज एक हैं और संस्कृति का मूल भी एक है। किसी की अलग पहचान मिटाए बिना सभी को साथ लेकर चलना चाहिए। भारत की परंपरा और विचारों में दुनिया की समस्याओं का समाधान देने की क्षमता है। (4) विकास हो लेकिन प्रकृति का नुकसान न हो; नेपाल बाढ़ का उदाहरण देते हुए कहा कि विकास के लिए तकनीक को बढ़ावा देना जरूरी है लेकिन इससे प्रकृति को नुकसान नहीं होना चाहिए। विकास ऐसा हो जिसमें इकोनॉमी के साथ इकोलॉजी और एथिक्स का भी ध्यान रखा जाए। (5) OTT के नियम तय हों, AI का सही इस्तेमाल हो; आज लोगों को हर तरह की जानकारी मिल रही है लेकिन सही-गलत समझे बिना इस्तेमाल करने से नुकसान हो सकता है। OTT प्लेटफॉर्म पर नियम होने चाहिए और सरकार-प्रशासन को इस पर ध्यान देना चाहिए। AI का सही इस्तेमाल करना जरूरी है।

भागवत ने आगे कहा कि संघर्ष के कारण मन में घाव और गांठें पड़ी हैं; ये गांठें सुलझ जाएं, नई गांठें न पड़ें, ऐसा व्यवहार होना चाहिए। छोटी-छोटी बातों पर उकसाने वाले ताक लगाकर बैठे हैं। कई लोग झगड़ा लगाना चाहते हैं और संघ पर भी उछालते हैं; जिनका संघ से कोई लेना-देना नहीं, फिर भी सवाल उठाते हैं। संघ सबसे प्रति प्रेम रखता है, स्वयं के लिए कुछ नहीं चाहता—न लोकप्रियता, न प्रतिष्ठा। समाज का जिससे भला हो, वही करता है। कैप्टन स्मित मच्छर ने हाल ही में जो किया वह उनके संस्कारों का स्वाभाविक परिणाम था; ऐसी स्थिति में क्या करना है इसकी उन्हें कोई ट्रेनिंग नहीं दी गई थी। परीक्षा की घड़ी में उनके भीतर पीढ़ियों से चले आ रहे संस्कार और परंपराएं सामने आईं। किसी की छोटी-सी पहचान को नष्ट किए बिना सबको साथ लेकर चलने की क्षमता होनी चाहिए। हम सबके पूर्वज और मूल एक हैं। हमारा स्वभाव परंपरा से आया है। आज के समय के अनुसार जीवन को गढ़ते हुए यही आदर्श दुनिया के सामने रखना है। भारत की प्रगति हो रही है लेकिन दुनिया को एक नई राह देने की जरूरत भी है। हिंदू दृष्टि में किसी अमुख पूजा की अनिवार्यता नहीं है; पूजा कौन सी है, पूजा करते हैं कि नहीं करते, हिंदू दृष्टि यह नहीं पूछती। ये सबके लिए है, यह मानवीय धर्म है।

विकास, प्रौद्योगिकी और भावी पीढ़ी

नेपाल में जो हुआ उसके पीछे हिमालयी क्षेत्र में एकतरफा विकास भी एक कारण है। हिमालय जिन-जिन देशों और क्षेत्रों से गुजरता है वहां विकास के प्रयासों के कारण प्रकृति में अस्थिरता पैदा हुई है। तकनीक को बढ़ावा दिया गया जिसके कारण इतनी बड़ी संख्या में लोगों की जान गई। विकास होना चाहिए जो सभी को साथ लेकर चले; ऐसा विकास नहीं चाहिए कि विकास करने वाला ही न बचे। ज्ञान और तकनीक का विकास होना चाहिए लेकिन इसके सही इस्तेमाल की समझ भी विकसित करनी होगी। इकोनॉमी के

Sharad Shrivastava