बैंक भर्ती फर्जीवाड़े में सीबीआई की बड़ी कार्रवाई, 172 फर्जी अधिकारी चिह्नित
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने बैंक भर्ती प्रक्रिया में फर्जीवाड़े का खुलासा करने के लिए पांच साल पुराने डेटा की जांच की। इस जांच में 2020 से 2024 तक की भर्ती परीक्षाओं के रिकॉर्ड दोबारा खंगाले गए। परीक्षा के समय लिए गए उम्मीदवारों के आइरिस स्कैन (आंखों की पुतली की पहचान) का मिलान किया गया, जिससे 257 संदिग्ध उम्मीदवारों की पहचान हुई।
इनमें से 172 व्यक्ति अलग-अलग बैंकों में नौकरी कर रहे थे। सीबीआई की स्पेशल टास्क ब्रांच, मुंबई ने 8 अक्टूबर को इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सनेल सिलेक्शन (आईबीपीएस) की शिकायत पर दर्ज एफआईआर के बाद मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, दिल्ली, बिहार, हरियाणा और पश्चिम बंगाल में एक साथ छापे मारे। जांच में सामने आया कि कुछ उम्मीदवारों की जगह दूसरे लोगों ने परीक्षा और इंटरव्यू दिए थे। फोटो और बायोमेट्रिक पहचान में अंतर मिलने पर संदिग्ध कर्मचारियों को चिह्नित किया गया।
आईबीपीएस ने सभी कार्यरत संदिग्धों और अन्य संदिग्ध उम्मीदवारों को आजीवन के लिए परीक्षा से डिबार कर दिया है। संबंधित बैंकों को उनके सर्विस रूल्स के तहत कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। मध्य प्रदेश में जांच के बाद ग्रामीण बैंक के 19 कर्मचारियों को निलंबित किया जा चुका है। सीबीआई ने अब तक चार लोगों को गिरफ्तार किया है, जबकि 135 लोगों को आरोपी बनाया गया है।
जांच की खासियत यह रही कि सिर्फ परीक्षा के समय पहचान जांचने के बजाय, पांच साल के पुराने रिकॉर्ड खंगालकर फर्जीवाड़े और नौकरी कर रहे उम्मीदवारों के बीच संबंध जोड़े गए। कुछ आइरिस स्कैन गिरफ्तार आरोपियों से मेल खाए, जबकि रिकॉर्ड में ये पहचान उन उम्मीदवारों की थी जिन्हें बैंक में नौकरी मिली थी। सीबीआई अब देशभर में अन्य फर्जी अधिकारियों की तलाश में जुटी है।
Satyam Tripathi