मंत्री विजयवर्गीय ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र, विकास में असहयोग की शिकायत

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मंत्री विजयवर्गीय ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र, विकास में असहयोग की शिकायत

मंत्री विजयवर्गीय ने मुख्यमंत्री को विकास कार्यों में असहयोग को लेकर लिखा पत्र

मध्य प्रदेश के नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को एक पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने कहा है कि उन्हें पिछले ढाई वर्षों से केवल असहयोग, उपेक्षा और विरोध ही मिल रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री से पांच प्रमुख बिंदुओं पर अपनी उपेक्षा की शिकायत की है।

मास्टर प्लान जारी करने में देरी

विजयवर्गीय ने पत्र में लिखा है कि इंदौर का मास्टर प्लान दो साल पहले मुख्यमंत्री को भेजा जा चुका है। विभागीय और सीएस स्तर पर कई बार चर्चा के बावजूद इसे आज तक जारी नहीं किया गया है। उन्होंने पहले भी इस संबंध में पत्र लिखे थे, लेकिन कोई जवाब या चर्चा नहीं हुई।

मेट्रोपॉलिटन रीजन में इंदौर का अवमूल्यन

उन्होंने आरोप लगाया कि इंदौर प्रदेश का सबसे बड़ा आर्थिक केंद्र होने के बावजूद, अधिसूचना में 'उज्जैन-इंदौर मेट्रोपॉलिटन रीजन' का नाम दिया गया, जबकि रीजन में इंदौर का हिस्सा 100% और उज्जैन का 59% है।

आरजीपीवी के विभाजन में अनदेखी

राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विवि को तीन भागों में बांटने के प्रस्ताव में भोपाल, उज्जैन और जबलपुर में इकाई प्रस्तावित हैं, लेकिन इंदौर के 1952 से स्थापित SGSITS की उपेक्षा की गई है। 50 से अधिक इंजीनियरिंग कॉलेज होने के बावजूद इंदौर को यह मौका नहीं मिला।

इंदौर-पीथमपुर क्षेत्र की उपेक्षा

पीथमपुर में बड़ी संख्या में MSME और बड़े कारखाने होने के बावजूद, राष्ट्रीय स्तर की टेस्टिंग लैब और प्रोडक्ट सर्टिफिकेशन सेंटर की स्थापना लंबित है। जबकि अपेक्षाकृत नए विक्रमपुरी उज्जैन औद्योगिक क्षेत्र में सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।

एयरपोर्ट विस्तार और सिंहस्थ में अनदेखी

विजयवर्गीय ने इंदौर एयरपोर्ट के विस्तार के लिए जमीन उपलब्ध कराने और सिंहस्थ के कार्यों में इंदौर की अनदेखी का भी उल्लेख किया। उन्होंने जल संकट के दौरान इंदौर शहर को विशेष राहत न मिलने पर भी असंतोष व्यक्त किया। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि इन विषयों का समाधान नहीं हुआ तो उन्हें इंदौर की जनता की आवाज को सार्वजनिक मंच पर उठाना पड़ेगा।

Ravi Yadav