नेपाल में हिंसक प्रदर्शन के बाद सोशल मीडिया बैन वापस
नेपाल में सोशल मीडिया पर लगे बैन और भ्रष्टाचार के खिलाफ सोमवार को युवा प्रदर्शनकारियों ने बड़ा आंदोलन किया। इस दौरान संसद भवन परिसर में घुसपैठ के बाद हिंसा भड़क गई। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस प्रदर्शन में अब तक 16 लोगों की मौत हो चुकी है और 200 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं।
सोशल मीडिया बैन से शुरू हुआ आंदोलन
नेपाल सरकार ने 3 सितंबर को फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब समेत 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध लगा दिया था। सरकार का तर्क था कि इन कंपनियों ने देश में पंजीकरण नहीं कराया, जिससे फेक आईडी, हेट स्पीच और साइबर क्राइम बढ़ रहे थे। यह प्रतिबंध सरकार और युवाओं के बीच तनाव का मुख्य कारण बन गया।
अभूतपूर्व प्रदर्शन और हिंसा
सोमवार सुबह 12 हजार से ज्यादा प्रदर्शनकारी संसद भवन परिसर में घुस गए। सेना ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए फायरिंग की, जिसमें कई लोगों की जान चली गई। प्रशासन ने कर्फ्यू लागू कर दिया और 'देखते ही गोली मारने' के आदेश दिए। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकार ने दमनकारी रवैया अपनाया।
प्रदर्शन का व्यापक प्रभाव
इस आंदोलन की अगुआई 18 से 30 साल के युवाओं ने की, जिन्हें 'जेनरेशन जेड' कहा जा रहा है। प्रदर्शन ने नेपाल के कई शहरों में सरकार के खिलाफ गुस्से को उजागर किया। काठमांडू प्रशासन ने सुरक्षा बढ़ा दी है, वहीं कई मशहूर हस्तियों ने भी प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया है।
सोशल मीडिया बैन हुआ खत्म
सरकार ने हिंसा और बढ़ते अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर से प्रतिबंध हटा दिया है। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि जो कंपनियां पंजीकरण करेंगी, उन्हें ही संचालन की अनुमति दी जाएगी।
यह प्रदर्शन नेपाल में युवाओं के गुस्से और बदलाव की मांग का प्रतीक बन गया है। सरकार की नीति और भ्रष्टाचार के आरोपों पर सवाल उठाते हुए, यह आंदोलन भविष्य में राजनीतिक और सामाजिक बदलाव का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।