सुप्रीम कोर्ट ने बच्चों के ऑनलाइन सुरक्षा और कंटेंट हटाने के डेटाबेस के लिए निर्देश दिए
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इंटरनेट का उपयोग हर व्यक्ति का मौलिक अधिकार है, जिसमें बच्चों का भी शामिल है। बच्चों को इंटरनेट से पूरी तरह दूर रखना बेतुका होगा। कोर्ट ने बच्चों के यौन शोषण और दुर्व्यवहार से जुड़े ऑनलाइन कंटेंट (CSEAM) को पहचानने और हटाने के लिए केंद्र को एक राष्ट्रीय डेटाबेस बनाने का निर्देश दिया है। सोशल मीडिया कंपनियों को ऐसा कंटेंट हटाने के दो घंटे के भीतर पुलिस या साइबर क्राइम पोर्टल को रिपोर्ट देनी होगी।
5 साल में बच्चों के यौन शोषण से जुड़े मामले 26.6 गुना बढ़े
गृह मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 2018 में बच्चों की अश्लील तस्वीरों और वीडियो से जुड़े मामले 44 थे, जो 2022 में 1,171 हो गए। यह 26.6 गुना बढ़ा है। वहीं, 2018 में 232 रहे साइबर अपराध के मामले 2022 में 1,823 हो गए। केंद्र ने 2022 के बाद का डेटा जारी नहीं किया। कोर्ट ने डेटाबेस में दर्ज सामग्री की सही पहचान के लिए निर्देश दिए हैं।
शिक्षा और पेड सेवाओं पर नजर
कोर्ट ने बच्चों को ऑनलाइन खतरों को पहचानना, अपनी निजी जानकारी सुरक्षित रखना और गलत व्यवहार होने पर मदद मांगना सिखाने के लिए शिक्षा कार्यक्रम तैयार करने का निर्देश दिया है। पेड और सब्सक्रिप्शन वाली सेवाओं की सख्त जांच करने के लिए कहा गया है। केंद्र सरकार को 10 दिसंबर 2026 तक निर्देशों पर कार्रवाई की रिपोर्ट देनी होगी।
Pushpendra Chaubey