सुप्रीम कोर्ट ने आधार को पहचान दस्तावेज़ माना, नागरिकता प्रमाण नहीं

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सुप्रीम कोर्ट ने आधार  को पहचान दस्तावेज़ माना, नागरिकता प्रमाण नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने आधार को पहचान दस्तावेज़ माना

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को बिहार में मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया से जुड़े विवाद में आधार कार्ड को पहचान दस्तावेज़ के रूप में स्वीकार करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आधार केवल पहचान के लिए मान्य होगा, लेकिन इसे नागरिकता या निवास का प्रमाण नहीं माना जाएगा।

याचिकाकर्ता की दलील

वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल, याचिकाकर्ताओं की ओर से, ने तर्क दिया कि BLO नागरिकता तय नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि आधार को पहचान के दस्तावेज़ के रूप में स्वीकार किया जाना चाहिए ताकि योग्य मतदाताओं को वोट का अधिकार मिल सके।

निर्वाचन आयोग का पक्ष

निर्वाचन आयोग ने अदालत को बताया कि 99.6 फीसदी मतदाताओं ने आवश्यक दस्तावेज़ जमा कर दिए हैं। आयोग ने माना कि आधार को डिजिटल रूप से अपलोड किया जा सकता है, लेकिन इसे नागरिकता का प्रमाण नहीं माना जा सकता। आयोग ने यह भी कहा कि 0.3 फीसदी लोग अवैध प्रवासी पाए गए हैं जिन्हें सूची में शामिल करना संभव नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियां

जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि आधार एक आधिकारिक पहचान दस्तावेज़ है और आयोग इसे सत्यापित करेगा। जस्टिस बागची ने कहा कि पासपोर्ट और जन्म प्रमाणपत्र के अलावा कोई भी दस्तावेज़ निर्णायक नागरिकता का प्रमाण नहीं है।

निर्णय का महत्व

सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि आधार को 12वें वैध दस्तावेज़ के रूप में स्वीकार किया जाए। आयोग को निर्देश दिए गए हैं कि इसे केवल पहचान स्थापित करने के लिए उपयोग किया जाए।

इस फैसले से बिहार में चल रही मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया में स्पष्टता आई है। लाखों मतदाताओं को आधार को पहचान दस्तावेज़ के रूप में शामिल करने से राहत मिल सकती है।