अयोध्या में STF की मुठभेड़ में 2 लाख का इनामी भानु प्रताप सिंह ढेर
अयोध्या में स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने 2 लाख रुपए के इनामी बदमाश भानु प्रताप सिंह उर्फ बबलू (38) को एक मुठभेड़ में मार गिराया। यह मुठभेड़ महाराजगंज थाना क्षेत्र के एमी घाट के पास रविवार देर रात लगभग 11 बजे हुई। STF को सूचना मिली थी कि भानु प्रताप अपने साथी के साथ बाइक से भाग रहा है। जब STF टीम ने उसे रोकने की कोशिश की, तो उसने स्टेन-गन से ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। STF ने जवाबी कार्रवाई में गोली चलाई, जिससे भानु प्रताप घायल हो गया।
मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान भानु प्रताप सिंह की मौत हो गई। मुठभेड़ के दौरान उसका साथी अंधेरे का फायदा उठाकर फरार होने में सफल रहा। भानु प्रताप सिंह गोरखपुर का रहने वाला था और उस पर दूध कारोबारी की हत्या, लूट और रंगदारी जैसी गंभीर धाराओं में कुल 41 मुकदमे दर्ज थे। पुलिस उसे एक हार्डकोर अपराधी मानती थी और लंबे समय से उसकी तलाश कर रही थी।
इनाम और मुकदमे
पुलिस के अनुसार, भानु प्रताप पर आजमगढ़ पुलिस ने 1 लाख रुपए, अंबेडकरनगर पुलिस ने 50 हजार, गोरखपुर पुलिस ने 25 हजार और बस्ती पुलिस ने 15 हजार रुपए का इनाम घोषित किया था। उसके खिलाफ दर्ज 40 मुकदमे इन्हीं जिलों में दर्ज थे। आजमगढ़ में उस पर चार गंभीर आपराधिक मुकदमे दर्ज थे, जिनमें से तीन लूट के मामले थे। 28 अक्टूबर 2023 को मुबारकपुर थाना क्षेत्र में दूध व्यापारी पातीराम यादव की गोली मारकर हत्या के मामले में वह वांटेड था।
मुठभेड़ का घटनाक्रम
रविवार रात करीब 11.10 बजे STF के निरीक्षक जेपी राय ने महाराजगंज पुलिस को एमी घाट के पास बदमाशों से मुठभेड़ की सूचना देकर मदद मांगी। पुलिस मौके पर पहुंची तो पता चला कि बाइक सवार दो बदमाशों की STF टीम से मुठभेड़ हुई थी। STF ने एंबुलेंस को सूचना दी, लेकिन एंबुलेंस समय पर नहीं पहुंचने पर STF ने खुद भानु प्रताप को CHC पूरा बाजार पहुंचाया। शुरुआती उपचार के बाद डॉक्टर्स ने उसे मेडिकल कॉलेज, दर्शननगर रेफर कर दिया, जहाँ इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
पारिवारिक पृष्ठभूमि
गोरखपुर के बेलघाट विधनापार का रहने वाला भानु प्रताप तीन भाइयों में दूसरे नंबर पर था। उसके बड़े भाई सबलू सिंह और छोटे भाई ज्ञान प्रताप सिंह बेंगलुरु में एक कंपनी में काम करते हैं। गांव में उसके पिता मान सिंह, मां और दोनों भाइयों की पत्नियां रहती हैं। गांव के लोगों ने बताया कि भानु प्रताप पिछले 10 सालों से गांव नहीं आया था और उसके घरवाले भी उससे कोई मतलब नहीं रखते थे।
Bhavanesh Soni