धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा: NEET पेपर लीक मामले में विरोध के बाद
इस्तीफे की घोषणा
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है। NEET पेपर लीक केस में उनके इस्तीफे की मांग करते हुए कॉकरोच जनता पार्टी पिछले 36 दिन से जंतर-मंतर पर धरना दे रही थी। प्रधान ने इस्तीफे को लेकर दो पेज और 575 शब्दों की चिट्ठी पोस्ट की, जिसमें उन्होंने युवाओं को भ्रमित करने की बात लिखी।
प्रतिक्रियाएं
कॉकरोच जनता पार्टी के प्रमुख अभिजीत दीपके ने कहा, "वे कहते थे, इस सरकार में इस्तीफे नहीं होते, लेकिन झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए।" उन्होंने आगे कहा कि मंत्री का इस्तीफा हुआ है, लेकिन उनकी दो और मांगें हैं - आत्महत्या करने वाले बच्चों के परिवार को एक करोड़ मुआवजा और पुलिसवालों पर कार्रवाई। सोशल मीडिया पर CJP ने कहा कि कॉकरोच की जीत हुई।
सोनम वांगचुक ने अस्पताल से पोस्ट करते हुए इसे लोकतंत्र की जीत बताया। उन्होंने लिखा, "यह सड़कों से मिली जीत है, शांति, धैर्य और दृढ़ता की जीत है।" उन्होंने CJP और GenZ को बधाई दी।
पूर्व घटनाक्रम
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने शनिवार सुबह दिल्ली में कहा था, "हम मनमानी करेंगे, शक्ति से सबके मालिक बनेंगे, ऐसा नहीं हो सकता।" उन्होंने नई पीढ़ी से संवाद की बात कही। भागवत का बयान आने के बाद ही प्रधान ने इस्तीफा दिया।
शुक्रवार रात NEET पेपर लीक मामले में NTA के 47 अधिकारी बर्खास्त किए गए थे और उनके खिलाफ क्रिमिनल केस दर्ज करने की बात कही गई। एक दिन पहले शिक्षा मंत्रालय के दो सचिवों को बदला गया था।
ऐतिहासिक संदर्भ
2014 में मोदी सरकार बनने के बाद 12 साल में विरोध के चलते इस्तीफा देने वाले धर्मेंद्र प्रधान पहले मंत्री हैं। इससे पहले 2018 में विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर ने 'मी टू' आरोपों के कारण इस्तीफा दिया था। गौरतलब है कि जून 2015 में तत्कालीन गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा था कि हमारे यहां इस्तीफे नहीं होते। यह भाजपा सरकार पर ललित मोदी मामले में आरोपों के बीच आया था।
1997 में ओडिशा में पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए धर्मेंद्र प्रधान को पुलिस ने पीटा था और उन्हें फ्रैक्चर हुआ था। वर्तमान में उसी मुद्दे पर उन्होंने इस्तीफा दिया है।
Sharad Shrivastava