बांग्लादेश में 20 साल का सबसे गंभीर बिजली संकट
उत्पादन क्षमता और ईंधन की कमी
बांग्लादेश इस समय 20 साल के सबसे गंभीर बिजली संकट से जूझ रहा है। कई इलाकों में रोजाना घंटों कटौती हो रही है। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, बारिशाल के एक अस्पताल में बैकअप जनरेटर का डीजल खत्म होने के बाद नर्सों को मोबाइल की टॉर्च की रोशनी में मरीजों की देखभाल करनी पड़ी। देश में इस समय 3,000 से 3,500 मेगावाट बिजली कम पड़ रही है। अगस्त में देश में रोज औसतन करीब 13 हजार मेगावाट बिजली बनी, जबकि जरूरत 16 हजार मेगावाट से ज्यादा थी। 2022 में कमी करीब 750 मेगावाट थी, यानी आज की कमी उस समय के मुकाबले करीब चार गुना है।
बिजली बनाने वाले प्लांट पर्याप्त हैं, लेकिन उन्हें चलाने के लिए जरूरी ईंधन की कमी हो गई है। खासकर प्राकृतिक गैस की सप्लाई घटने से गैस आधारित प्लांट पूरी क्षमता से नहीं चल पा रहे। 2024-25 में बांग्लादेश की करीब 44% बिजली गैस से बनी थी। देश में गैस का उत्पादन लगातार कम हुआ है। 2018-19 में घरेलू गैस उत्पादन 27.2 अरब घन मीटर था, जो 2024-25 में घटकर 19.6 अरब घन मीटर रह गया। कमी पूरी करने के लिए बांग्लादेश ने गैस का आयात बढ़ाया। इस दौरान आयात 143% बढ़कर 3.28 अरब से 7.98 अरब घन मीटर हो गया।
बांग्लादेश विदेशों से आने वाली गैस के लिए कॉक्स बाजार के मोहेशखाली में बने LNG टर्मिनलों पर निर्भर है। 21 जुलाई को दो टर्मिनलों में से एक में आग लग गई और उसे बंद करना पड़ा। इससे गैस की कमी और बढ़ गई। अगस्त में रोज करीब 2,235 मिलियन क्यूबिक फीट गैस मिल रही थी, जबकि जरूरत 3,860 मिलियन क्यूबिक फीट की थी। हालांकि, 16 सितंबर को द डेली स्टार ने बताया कि देश में गैस का उत्पादन बढ़ने के बाद सप्लाई अब पहले जैसी हो गई है।
कोयले से चलने वाले बिजली प्लांटों में खराबी ने भी संकट बढ़ा दिया है। बांग्लादेश में ऐसे प्लांटों की कुल क्षमता करीब 7,000 मेगावाट है, लेकिन कई प्लांट पूरी क्षमता से नहीं चल रहे। चीन के साथ मिलकर बनाए गए पाटुआखाली के दो 1,320 मेगावाट के प्लांटों में हर एक से सिर्फ 500 से 800 मेगावाट बिजली बन रही थी। वहीं, भारत के साथ मिलकर बने 1,100 मेगावाट के रामपाल प्लांट में बॉयलर खराब होने से उत्पादन घटकर 657 मेगावाट रह गया था।
क्षेत्रीय प्रभाव और सरकारी प्रतिक्रिया
बिजली संकट का बड़ा असर बांग्लादेश के गारमेंट सेक्टर पर पड़ा है। देश के कुल मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट में इस सेक्टर की हिस्सेदारी 80% से ज्यादा है। BKMEA के सर्वे के मुताबिक, 55% निटवेयर फैक्ट्रियों के ऑर्डर रद्द हुए या कम हुए। 78% फैक्ट्रियों में उत्पादन घटा, जबकि 87% को सामान भेजने में देरी हुई। बिजली की कमी से निटिंग का उत्पादन 37-38%, डाइंग 51% और गारमेंट सिलाई का उत्पादन 40% तक घट गया। गैस और बिजली की कमी के चलते करीब 600 टेक्सटाइल फैक्ट्रियों में उत्पादन रुकने की भी रिपोर्ट है।
आम लोगों पर भी असर पड़ रहा है। मयमनसिंह, बारिशाल, रंगपुर, सिलहट, राजशाही और खुलना में कई जगह रोज 3 से 10 घंटे तक बिजली कट रही है। बारिशाल जनरल अस्पताल में बिजली हर एक-दो घंटे में जा रही थी। जनरेटर के लिए डीजल खत्म होने के बाद नर्सों ने मोबाइल की टॉर्च से मरीजों की देखभाल की।
बिजली कटौती के खिलाफ देश के कई हिस्सों में प्रदर्शन हुए हैं। सितंबर में जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले 11 दलों के गठबंधन ने ढाका-चटगांव लॉन्ग मार्च किया। प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने 5 सितंबर को संकट से प्रभावित लोगों से माफी मांगी। उन्होंने 9 सितंबर को कहा कि सरकार आयातित ऊर्जा पर निर्भरता कम करने के लिए सोलर पावर की लंबी अवधि की योजना बना रही है। सरकार ने संकट के लिए पिछली अवामी लीग सरकार की नीतियों को जिम्मेदार बताया है। वहीं विपक्ष ने मौजूदा सरकार पर संकट से निपटने में कुप्रबंधन और देरी के आरोप लग
Arvind Vishwakarma