बिहार चुनाव 2025: महागठबंधन प्रचार में कांग्रेस की भूमिका
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर महागठबंधन में प्रचार की रणनीति पर तस्वीर साफ होती नजर आ रही है। कांग्रेस ने ऐलान किया है कि वह महागठबंधन के प्रचार अभियान को लीड करेगी और अपने मुद्दों को चुनावी घोषणा पत्र में शामिल करवाएगी। इस घोषणा के बाद राजनीतिक गलियारों में कांग्रेस की भूमिका को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
कांग्रेस का महागठबंधन में बढ़ता प्रभाव
कांग्रेस महासचिव नासिर हुसैन ने गुरुवार को पटना स्थित पार्टी कार्यालय सदाकत आश्रम में प्रेस वार्ता के दौरान यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पार्टी न केवल अपने मुद्दों को घोषणा पत्र का हिस्सा बनाएगी, बल्कि सत्ता में आने पर उन्हें लागू भी करेगी। कांग्रेस ने अति पिछड़ा वर्ग के आरक्षण को बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। हुसैन ने बताया कि कर्नाटक और तेलंगाना जैसे कांग्रेस शासित राज्यों में यह नीति पहले ही लागू की जा चुकी है और बिहार में भी इसे लागू किया जाएगा।
सीट शेयरिंग और सीएम फेस पर असमंजस
महागठबंधन में सीट शेयरिंग और मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर अभी भी पेच फंसा हुआ नजर आ रहा है। कांग्रेस ने 76 सीटों की लिस्ट राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेता तेजस्वी यादव को सौंपी है। कांग्रेस ने यह भी साफ कर दिया है कि अगर सीट शेयरिंग पर सहमति में देरी हुई, तो वह 30 सीटों पर अपने उम्मीदवारों को मैदान में उतार देगी।
तेजस्वी यादव को महागठबंधन का मुख्यमंत्री चेहरा घोषित करने पर भी कांग्रेस ने अब तक कोई स्पष्ट रुख नहीं अपनाया है। आरजेडी और अन्य घटक दल जहां तेजस्वी को सीएम फेस प्रोजेक्ट कर रहे हैं, वहीं कांग्रेस इस सवाल पर चुप्पी साधे हुए है।
कांग्रेस का ध्यान चुनावी रणनीति पर
कांग्रेस के शीर्ष नेताओं, जिनमें लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और बिहार कांग्रेस प्रभारी कृष्णा अल्लावरु शामिल हैं, ने भी इस मुद्दे पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया है। अल्लावरु ने हाल ही में पटना में बयान दिया कि मुख्यमंत्री का चेहरा फिलहाल पार्टी का मुख्य मुद्दा नहीं है। उनका जोर इस बात पर है कि वोटों की चोरी को कैसे रोका जाए।
चुनावी घोषणा की संभावना
बिहार में विधानसभा चुनाव की घोषणा अगले महीने होने की संभावना है। ऐसे में महागठबंधन के घटक दलों के बीच सीट शेयरिंग और प्रचार रणनीति को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया तेज हो गई है। कांग्रेस ने अपने रुख से यह संकेत दे दिया है कि वह इस बार गठबंधन में अहम भूमिका निभाने को तैयार है।
कुल मिलाकर, कांग्रेस ने महागठबंधन में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए बड़ा दांव खेला है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि महागठबंधन का प्रचार अभियान किस दिशा में आगे बढ़ता है और क्या कांग्रेस अपने संकल्पों को वास्तविकता में बदलने में सफल होती है।