चंद्रग्रहण :रविवार 7 सितंबर को : सूतक काल ग्रहण शुरू होने से 9 घंटे पहले

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चंद्रग्रहण :रविवार 7 सितंबर को : सूतक काल ग्रहण शुरू होने से 9 घंटे पहले

रविवार को चंद्रग्रहण: 7 सितंबर 2025, रविवार को साल का दूसरा और अंतिम चंद्रग्रहण होगा, जो भारत सहित विश्व के कई हिस्सों में दिखाई देगा। यह एक पूर्ण चंद्रग्रहण होगा, जिसे खगोलीय और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस ग्रहण का विशेष आकर्षण यह है कि यह भाद्रपद पूर्णिमा के दिन होगा, जो पितृपक्ष की शुरुआत का दिन भी है। यह दुर्लभ संयोग 122 वर्षों में पहली बार बन रहा है, जिसके कारण इसकी धार्मिक और ज्योतिषीय महत्ता और बढ़ जाती है। चंद्रग्रहण का समय और दृश्यता चंद्रग्रहण 7 सितंबर 2025 को रात 9:57 बजे शुरू होगा और 8 सितंबर को तड़के 1:27 बजे समाप्त होगा। पूर्ण चंद्रग्रहण का चरण रात 11:01 बजे से 12:23 बजे तक रहेगा, जो लगभग 82 मिनट तक चलेगा। इस दौरान चंद्रमा पृथ्वी की छाया में पूरी तरह ढक जाएगा और लाल रंग का दिखाई देगा, जिसे 'ब्लड मून' कहा जाता है। यह खगोलीय नजारा भारत के सभी प्रमुख शहरों जैसे दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, हैदराबाद, लखनऊ, पुणे और चंडीगढ़ में स्पष्ट रूप से दिखाई देगा। इसके अलावा, यह ग्रहण यूरोप, ऑस्ट्रेलिया, पश्चिमी प्रशांत महासागर, हिंद महासागर और अंटार्कटिका में भी दृश्य होगा। सूतक काल और धार्मिक मान्यताएं हिंदू धर्म में चंद्रग्रहण को धार्मिक दृष्टि से अशुभ माना जाता है, और इसके साथ सूतक काल का पालन किया जाता है। सूतक काल ग्रहण शुरू होने से 9 घंटे पहले, यानी 7 सितंबर को दोपहर 12:57 बजे से शुरू होगा और ग्रहण समाप्ति के साथ, यानी 8 सितंबर को रात 1:27 बजे खत्म होगा। कुछ स्रोतों के अनुसार, सूतक दोपहर 12:35 बजे से शुरू हो सकता है। इस दौरान पूजा-पाठ, हवन, यज्ञ, विवाह, गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्य वर्जित होते हैं। मंदिरों के पट बंद रहते हैं, और काशी जैसे धार्मिक स्थलों में गंगा आरती का समय भी बदलकर दोपहर 12 से 1 बजे के बीच कर दिया गया है। धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, चंद्रग्रहण के दौरान राहु और केतु का प्रभाव बढ़ता है, जिससे नकारात्मक ऊर्जा का असर हो सकता है। इस समय भोजन बनाना, खाना, नुकीली वस्तुओं (जैसे चाकू, सुई) का उपयोग, और बाहर जाना, खासकर गर्भवती महिलाओं के लिए, वर्जित माना जाता है। गर्भवती महिलाओं को सलाह दी जाती है कि वे ग्रहण को नंगी आंखों से न देखें और घर में रहें। ग्रहण के दौरान भगवान शिव, विष्णु या चंद्र मंत्रों का जाप, जैसे 'महामृत्युंजय मंत्र' या 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' का उच्चारण, शुभ माना जाता है। ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान, दान, और पूजा करने से शुभ फल प्राप्त होते हैं। वैज्ञानिक दृष्टिकोण वैज्ञानिक रूप से, चंद्रग्रहण तब होता है जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है, और उसकी छाया चंद्रमा पर पड़ती है। पूर्ण चंद्रग्रहण में चंद्रमा पूरी तरह पृथ्वी की छाया में आ जाता है, और सूर्य की किरणें पृथ्वी के वातावरण से गुजरकर लाल रंग का प्रभाव डालती हैं। इसे सुरक्षित रूप से नंगी आंखों, दूरबीन, या टेलीस्कोप से देखा जा सकता है, और इसके लिए विशेष उपकरणों की आवश्यकता नहीं होती। सावधानियां और उपाय: ग्रहण के दौरान खाद्य पदार्थों में तुलसी के पत्ते या कुशा डालकर उन्हें सुरक्षित रखने की परंपरा है। गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। ग्रहण के बाद घर में गंगाजल का छिड़काव और स्नान करना शुभ माना जाता है। यह ग्रहण 12 राशियों पर अलग-अलग प्रभाव डालेगा, और ज्योतिषियों के अनुसार, कुछ राशियों के लिए यह शुभ तो कुछ के लिए अशुभ हो सकता है। निष्कर्ष 7 सितंबर 2025 का चंद्रग्रहण एक महत्वपूर्ण खगोलीय और धार्मिक घटना होगी। यह न केवल खगोल प्रेमियों के लिए एक शानदार दृश्य होगा, बल्कि धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से भी इसका विशेष महत्व है। सूतक काल और धार्मिक नियमों का पालन करना चाहिए