एमपी कैबिनेट ने विजय शाह पर केस की मंजूरी नहीं दी

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एमपी कैबिनेट ने विजय शाह पर केस की मंजूरी नहीं दी

मध्य प्रदेश कैबिनेट ने मंत्री विजय शाह पर अभियोजन स्वीकृति नहीं देने का निर्णय लिया

मध्य प्रदेश सरकार ने मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह के खिलाफ कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित टिप्पणी के मामले में अभियोजन चलाने की अनुमति नहीं देने का फैसला किया। बैठक में चर्चा के दौरान स्वयं मंत्री शाह भी मौजूद थे।

कैबिनेट का तर्क और प्रक्रिया

सूत्रों के अनुसार, अभियोजन स्वीकृति नहीं देने का आधार यह बताया गया कि शाह इस बयान पर कई बार सार्वजनिक रूप से माफी मांग चुके हैं। चर्चा शुरू होने पर सभी अधिकारियों को बाहर जाने को कहा गया। निर्णय मुख्यमंत्री, मंत्रियों, मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल, अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई, अपर मुख्य सचिव संजय कुमार शुक्ला और विधि विभाग के सचिव की मौजूदगी में लिया गया। हालांकि, बैठक की ब्रीफिंग में मंत्री राकेश सिंह ने इस एजेंडा पर चर्चा होने से इनकार किया।

सुप्रीम कोर्ट में लंबित सुनवाई

इस मामले में 31 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई तय है। उससे पहले राज्य सरकार अपना रुख एफिडेविट के जरिए अदालत के सामने रखेगी। पूर्व में सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी 2026 की सुनवाई में सरकार को दो सप्ताह में फैसला लेने का निर्देश दिया था और शाह की माफी पर टिप्पणी की थी कि माफी मांगने में काफी देर हो चुकी है। मई में कोर्ट ने पुराने निर्देशों का पालन कर चार सप्ताह में अनुपालन रिपोर्ट देने को कहा था, लेकिन 23 जुलाई की ऑफिस रिपोर्ट के अनुसार सरकार ने कोई दस्तावेज दाखिल नहीं किया था।

एसआईटी की मांग और कानूनी स्थिति

जांच के लिए गठित एसआईटी ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 196(1)(a) के तहत केस चलाने की अनुमति मांगी थी। एसआईटी जांच पूरी कर अंतिम रिपोर्ट दे चुकी है, लेकिन मंजूरी का मामला राज्य सरकार के पास लंबित था। वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा ने कहा कि कोर्ट चाहे तो इस फैसले को बदल सकता है।

विवादित बयान का विवरण

मंत्री विजय शाह ने 11 मई 2025 को इंदौर के महू स्थित रायकुंडा गांव में हलमा कार्यक्रम के दौरान ऑपरेशन सिंदूर के संदर्भ में कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर विवादित टिप्पणी की थी।

आगे के विकल्प

विशेषज्ञों के अनुसार, यदि सरकार भविष्य में अभियोजन स्वीकृति देती है तो इसकी जानकारी सुप्रीम कोर्ट को एफिडेविट के जरिए दी जा सकती है। स्वीकृति नहीं मिलने पर भी मामला खत्म नहीं होगा; शाह के मंत्री पद से हटने के बाद एसआईटी उनके खिलाफ अभियोजन की कार्रवाई आगे बढ़ा सकती है, तब सरकार की पूर्व अनुमति की आवश्यकता नहीं होगी।

L. N. Bhargava