गांधीनगर में पीएम मोदी और जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज की मुलाकात
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के बीच सोमवार को गांधीनगर के महात्मा मंदिर कनवेंशन सेंटर में द्विपक्षीय वार्ता हुई। यह मुलाकात भारत और जर्मनी के बीच बढ़ते सहयोग और साझेदारी को आगे बढ़ाने पर केंद्रित रही।
द्विपक्षीय वार्ता और भारत-जर्मनी संबंध
वार्ता के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और जर्मनी करीबी सहयोगी हैं, जिसके प्रमाण के रूप में आज भारत में 2000 से ज्यादा जर्मन कंपनियां काम कर रही हैं। उन्होंने इसे जर्मनी के भारत के प्रति अटूट विश्वास का प्रतीक बताया। मोदी ने कहा कि भारत और जर्मनी नई परियोजनाओं को आगे बढ़ा रहे हैं और लगभग हर क्षेत्र में मिलकर काम कर रहे हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि आज हुए समझौतों (एमओयू) से दोनों देशों के संबंध और मजबूत होंगे।
साझा यात्रा और व्यक्तिगत तालमेल
औपचारिक कार्यक्रमों के बाद नरेंद्र मोदी और फ्रेडरिक मर्ज एक ही कार में साथ सफर करते दिखे। इस यात्रा की फोटो प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा की। उन्होंने लिखा कि भारत और जर्मनी की दोस्ती साझा मूल्यों, व्यापक सहयोग और आपसी समझ के जरिए लगातार मजबूत हो रही है। इस तस्वीर को दोनों नेताओं के बीच व्यक्तिगत तालमेल और निकटता का प्रतीक माना जा रहा है।
साबरमती आश्रम और अंतरराष्ट्रीय काइट फेस्टिवल
दोनों नेता सोमवार सुबह सबसे पहले अहमदाबाद के साबरमती आश्रम पहुंचे और महात्मा गांधी को नमन किया। आश्रम के बाद मोदी और मर्ज साबरमती रिवरफ्रंट गए, जहां उन्होंने इंटरनेशनल काइट फेस्टिवल में हिस्सा लिया और साथ मिलकर पतंग उड़ाई। इस कार्यक्रम के जरिए दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और जनस्तरीय जुड़ाव का संदेश भी उभरकर सामने आया।
महात्मा गांधी के विचारों पर फ्रेडरिक मर्ज का संदेश
साबरमती आश्रम के गेस्ट बुक में जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने लिखा कि महात्मा गांधी की अहिंसा की अवधारणा, स्वतंत्रता की शक्ति में उनका विश्वास और हर व्यक्ति की गरिमा में उनकी आस्था आज भी लोगों को प्रेरित करती है। उन्होंने कहा कि गांधी के आदर्शों की आज पहले से कहीं अधिक आवश्यकता है।
पीएम मोदी का गुजरात दौरा और अन्य कार्यक्रम
यह मुलाकात प्रधानमंत्री मोदी के तीन दिवसीय गुजरात दौरे के आखिरी दिन हुई। दौरे के दूसरे दिन रविवार को वे राजकोट में लगभग 1 किलोमीटर लंबी शौर्य यात्रा में शामिल हुए और एक मंदिर में करीब 30 मिनट तक पूजा-अर्चना की। इसके बाद उन्होंने राजकोट में वाइब्रेंट गुजरात सौराष्ट्र रीजनल कार्यक्रम का उद्घाटन किया। वहीं अहमदाबाद पहुंचकर उन्होंने अहमदाबाद मेट्रो के फेज-2 का उद्घाटन भी किया।
अपने संबोधन में मोदी ने सोमनाथ मंदिर का उल्लेख करते हुए कहा कि सोमनाथ मंदिर में फहरा रही ध्वजा हिंदुस्तान की शक्ति को दर्शाती है। उन्होंने यह भी कहा कि दुर्भाग्य से आज भी देश में वे ताकतें मौजूद हैं जिन्होंने सोमनाथ के पुनर्निर्माण का विरोध किया था। उन्होंने जवाहरलाल नेहरू का नाम लिए बिना कहा कि जब सरदार पटेल ने सोमनाथ के पुनर्निर्माण की शपथ ली, तो उन्हें भी रोकने की कोशिश की गई थी।
दौरे का पहला दिन: सोमनाथ स्वाभिमान पर्व
10 जनवरी को गुजरात दौरे के पहले दिन प्रधानमंत्री मोदी सोमनाथ पहुंचे थे। सोमनाथ मंदिर पर 1026 में हुए पहले आक्रमण के 1000 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में 8 से 11 जनवरी तक ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ मनाया गया। इस दौरान मोदी ने रोड शो किया, सोमनाथ मंदिर की महाआरती में शामिल हुए और 72 घंटे चलने वाले ऊं जाप में भाग लेकर स्वयं भी ऊं जाप किया। उन्होंने ड्रोन शो भी देखा और X पर लिखा कि सोमनाथ आकर वे धन्य महसूस कर रहे हैं और यह स्थल भारत की सभ्यतागत साहस का गौरवपूर्ण प्रतीक है।
सोमनाथ मंदिर का ऐतिहासिक संदर्भ
सोमनाथ मंदिर से जुड़ी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के अनुसार, वर्ष 1026 में महमूद गजनवी ने इस मंदिर पर हमला कर इसे ध्वस्त कर दिया था। बाद के समय में विभिन्न मुस्लिम शासकों ने इस पर कई बार हमले किए, जिसके बाद स्वतंत्र भारत में सरदार पटेल की पहल पर इसका पुनर्निर्माण किया गया। 11 मई 1951 को पुनर्निर्मित सोमनाथ मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा हुई थी, जिसके 75 वर्ष पूरे होने के संदर्भ में भी सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का आयोजन किया गया।
इन सभी कार्यक्रमों और मुलाकातों के बीच गांधीनगर में प्रधानमंत्री मोदी और जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज की वार्ता ने भारत-जर्मनी संबंधों और साझा मूल्यों को नए सिरे से रेखांकित किया, जिसमें आर्थिक सहयोग, सांस्कृतिक जुड़ाव और ऐतिहासिक विरासत का संदेश साथ-साथ दिखाई दिया।
L. N. Bhargava