बिहार में गरीब परिवार और ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए शिक्षा शुल्क माफी
बिहार में गरीब परिवार के बच्चों, सभी वर्ग की लड़कियों और ट्रांसजेंडर समुदाय को बिहार मुक्त विद्यालयी शिक्षण संस्थान (बीबोस) में नामांकन और परीक्षा शुल्क माफ करने की योजना बनाई गई है। इस पहल से राज्य में हर साल एक लाख से अधिक विद्यार्थियों को लाभ मिलने की संभावना है।
शिक्षा विभाग द्वारा प्रस्तावित योजना
शिक्षा विभाग ने इस योजना को लागू करने के लिए प्रस्ताव तैयार किया है और इसे राज्य की लोक वित्त समिति को भेजा गया है। समिति से सहमति मिलने के बाद इसे कैबिनेट की मंजूरी दी जाएगी। शिक्षा विभाग का लक्ष्य है कि चालू सत्र से ही यह व्यवस्था लागू हो जाए। योजना के तहत लाभ लेने के लिए लाभार्थियों को बिहार का निवासी होना अनिवार्य है।
आर्थिक लाभ और शुल्क संरचना
एक विद्यार्थी को मैट्रिक या इंटरमीडिएट के लिए औसतन 4 से 5 हजार रुपए तक का लाभ मिलेगा। सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों के लिए नामांकन शुल्क 2200 रुपए है, जबकि अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के लिए यह 1500 रुपए है। प्रत्येक विषय के लिए अलग-अलग शुल्क तय है, जैसे कि विज्ञान विषय के लिए 305 रुपए प्रति विषय। इस योजना से शिक्षा विभाग को 40 करोड़ रुपए अतिरिक्त खर्च करने होंगे।
बीबोस: ओपन स्कूलिंग का विकल्प
बिहार मुक्त विद्यालयी शिक्षण संस्थान (बीबोस) राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (एनआईओएस) की तरह ही ओपन स्कूलिंग का विकल्प है। इसके तहत विद्यार्थी किसी स्कूल में नियमित कक्षाएं किए बिना मैट्रिक या इंटरमीडिएट की परीक्षा दे सकते हैं। वर्तमान में बीबोस से जुड़े छात्र-छात्राओं की परीक्षा बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के माध्यम से आयोजित की जा रही है।
इस योजना से बिहार में कमजोर वर्ग और ट्रांसजेंडर समुदाय के विद्यार्थियों को शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर अवसर मिलेंगे। शिक्षा विभाग की यह पहल राज्य में शिक्षा को अधिक समावेशी और सुलभ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।