पेट्रोल-डीजल 90 पैसे महंगा, 5 दिन में दूसरी बार बढ़ीं कीमतें; छिंदवाड़ा में बिक्री की लिमिट तय
देश में पेट्रोल और डीजल मंगलवार से 90 पैसे प्रति लीटर महंगा हो गया है। एक हफ्ते से भी कम समय में ईंधन के दामों में यह दूसरी बढ़ोतरी है। इससे पहले 15 मई को ही पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 3-3 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई थी।
विभिन्न शहरों में नए रेट:
छिंदवाड़ा में पेट्रोल-डीजल बिक्री पर लिमिट तय:
छिंदवाड़ा में पेट्रोल-डीजल की बिक्री पर लिमिट तय कर दी गई है। दोपहिया वाहनों को ₹200, छोटी कारों को ₹500 से अधिक का पेट्रोल नहीं दिया जा रहा है। बड़ी गाड़ियों में अधिकतम 50 लीटर पेट्रोल और 200 लीटर डीजल की सीमा तय है। तेल कंपनियों ने डीलर्स कोमौखिक निर्देशजारी कर यह सीमा तय की है और ऑनलाइन निगरानी की जा रही है। निर्धारित लिमिट से अधिक ईंधन बेचने पर रिफ्यूलिंग मशीन को लॉक करने की चेतावनी दी गई है। कंपनियों द्वारा नया टैंकर तभी भेजा जा रहा है जब पंप का स्टॉक लगभग समाप्त हो।
कीमतों में बढ़ोतरी का कारण:
इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों मेंउतार-चढ़ावहै। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के कारण क्रूड ऑयल के दाम 70 डॉलर से बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गए हैं। इस वजह से तेल कंपनियां घाटे में चल रही थीं, जिसकी भरपाई के लिए उन्होंने यह कदम उठाया है। यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक बढ़ती रहीं, तो पेट्रोल-डीजल की कीमतें और भी बढ़ सकती हैं।
ईंधन की कीमत कैसे तय होती है:
ईंधन के दाम अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर के मुकाबले रुपए की स्थिति के आधार पर तय होते हैं। सरकारी तेल कंपनियां 'डेली प्राइस रिवीजन' यानीडायनेमिक प्राइसिंग सिस्टमके तहत हर दिन सुबह 6 बजे नए रेट अपडेट करती हैं। उपभोक्ता तक पहुंचने से पहले तेल की कीमतों में कई तरह के टैक्स और खर्च जुड़ते हैं:
सरकारी कंपनियों को ₹30,000 करोड़ का घाटा:
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण हर महीने पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की बिक्री पर करीब ₹30,000 करोड़ का नुकसान झेल रही थीं।
प्रधानमंत्री का सुझाव:
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 मई को पेट्रोलियम उत्पादों के सावधानीपूर्वक उपयोग का सुझाव दिया था। उन्होंने कहा था कि आज समय की मांग है कि पेट्रोल, गैस और डीजल का उपयोग बहुत संयम से किया जाए। इससे न केवल विदेशी मुद्रा बचेगी, बल्कि युद्ध के प्रतिकूल प्रभाव भी कम होंगे।
Sharad Shrivastava