केंद्रीय मंत्री एल मुरुगन ने पद और राज्यसभा सदस्यता छोड़ी
केंद्रीय सूचना और प्रसारण तथा संसदीय कार्य राज्य मंत्री एल मुरुगन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पांच पन्नों का पत्र लिखकर राज्यसभा की सदस्यता भी त्यागने की जानकारी दी है।
पत्र में मुरुगन ने लिखा है कि उन्हें जिम्मेदारियों से मुक्त किया जाए क्योंकि वे तमिलनाडु में भारतीय जनता पार्टी को मजबूत करने के लिए अपना समय देना चाहते हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश और तमिलनाडु की सेवा को अपने जीवन का सबसे बड़ा सम्मान बताया और अपने गरीब पारिवारिक पृष्ठभूमि का उल्लेख किया।
तमिलनाडु के मूल निवासी मुरुगन मध्य प्रदेश से राज्यसभा सांसद थे और उनका कार्यकाल अप्रैल 2030 तक था। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में वे अविनाशी (अनुसूचित जाति) सीट से उम्मीदवार थे और दूसरे स्थान पर रहे। उन्हें 56,200 से अधिक मत मिले, लेकिन मुख्यमंत्री विजय की पार्टी तमिझागा वेत्री कषगम (टीवीके) की उम्मीदवार कमाली एस. से 15,373 मतों के अंतर से हार गए।
मुरुगन के पिता लोगनाथन और माता वरुदम्मल तमिलनाडु के नमक्कल जिले के कुनूर गांव में दिहाड़ी मजदूरी करते हैं। वे अनुसूचित जाति के अरुंथथियार समुदाय से आते हैं। बेटे के केंद्रीय मंत्री और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद भी उनके माता-पिता की दिनचर्या में कोई बदलाव नहीं आया। ग्रामीणों के अनुसार कोरोना महामारी के दौरान लोगनाथन आम नागरिकों की तरह टीका लगवाने के लिए कतार में खड़े हुए थे।
माता वरुदम्मल ने कहा था कि उन्होंने बेटे का भविष्य बनाने के लिए कुछ नहीं किया, आज उसने जो मुकाम हासिल किया है वह उसकी अपनी मेहनत है। उन्हें बेटे पर गर्व है। मंत्री बनने की खबर मिलने के बाद भी दोनों ने खेतों में काम करना बंद नहीं किया।
Sharad Shrivastava