बिहार बीजेपी संगठन में मप्र मॉडल की धमक...बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी तैयारियों में नई धार ला दी है और इसकी नींव रखी है मध्यप्रदेश भाजपा के उन दिग्गज नेताओं ने, जिनकी संगठन समझ और जमीनी पकड़ पहले से ही देशभर में चर्चित है और जिसकी बीजेपी के आलाकमान तारीफ करते रहते हैं.दरअसल बिहार के 18 लोकसभा और 145 विधानसभा क्षेत्रों में संगठन की मजबूती के लिए जिस तरह से मप्र के नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी गई है, वह भाजपा के रणनीतिक कौशल का बड़ा उदाहरण है. यहां बात चाहे पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और खजुराहो से सांसद वीडी शर्मा की करें तो उन्हें पटना क्षेत्र की जिम्मेदारी दी गई है..उन्होंने अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए कार्यकर्ताओं की बैठकें शुरू कर दी हैं.. तो वहीं मप्र के प्रदेश संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा और मप्र के प्रदेश बीजेपी प्रभारी डॉ. महेन्द्र सिंह, जो मिथिला और तिरहुत जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में..बूथ स्तर पर संगठनात्मक मजबूती दे रहे हैं..इन सभी नेताओं की कार्यशैली भाजपा के "बूथ जीतो–चुनाव जीतो" सूत्र को साकार करती दिख रही है. बिहार में विशेष रूप से सारण और चंपारण की जटिल राजनीतिक बनावट में मप्र और छग के क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल ने अपनी रणनीतिक समझ से नई दिशा देना शुरू कर दिया है..बूथ प्रबंधन,शक्ति केंद्रों की सक्रियता और कार्यकर्ताओं के बीच प्रत्यक्ष संवाद भी बिहार में तैनात मप्र के नेताओं की संगठनात्मक रणनीति का अहम हिस्सा बन चुका है..इधर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की बिहार में सक्रियता और लगातार दौरे, साथ ही बिहार मूल के मतदाताओं के साथ उनका संवाद,पार्टी की गहरी योजना का हिस्सा ही माना जाएगा..मप्र के पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान भी बिहार पर खासा फोकस कर रहे हैं. दरअसल बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व,विशेषकर गृहमंत्री अमित शाह और चुनाव प्रभारी धर्मेन्द्र प्रधान ने एक ठोस रणनीति के तहत..मध्यप्रदेश के शीर्ष नेताओं की सांगठनिक क्षमताओं पर भरोसा कर बिहार के चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में इन्हें जिम्मेदारी सौंपी है.खास बात यह है कि जिस तरह बिहार को पांच भागों में बांटकर कार्य विभाजन किया गया है, वह भी मप्र के चुनावी अनुभव का ही विस्तार है..क्योंकि मप्र में दो दशक से ज्यादा समय से सत्ता में बनी भाजपा के पास जमीनी स्तर पर काम करने और बूथ स्तर तक संगठन पहुंचाने का जो अनुभव है, वही अब बिहार की धरती पर दिखाई देने लगा है.और मध्यप्रदेश भाजपा नेताओं की शुरुआती मेहनत और मैनेजमेंट ने बिहार भाजपा के लिए मजबूत आधारशिला रखना शुरू कर दिया है..यहां यह कहना भी गलत नहीं होगा कि मप्र का यह मॉडल, बिहार में भाजपा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकता है. कुल मिलाकर हाल फिलहाल बिहार चुनावी तारीखों के ऐलान से पहले मप्र के बड़े दिग्गजों..सीएम डॉ मोहन यादव.. की सक्रियता बिहार में साफ नजर आ रही है..क्योंकि यहां यादव मतदाता हार जीत में गेम चेंजर होते हैं..इससे पहले भी सीएम डॉ मोहन यादव बिहार के कई दौर कर चुके हैं..इधर केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की सक्रियता किसी से छिपी नहीं..भाजपा आलाकमान ने मप्र अपना लोहा मनवा चुके..अजय जमवाल,हितानन्द शर्मा,महेंद्र सिंह चौहान, मध्य प्रदेश भाजपा के पूर्व अध्यक्ष वीडी शर्मा,खेल मंत्री विश्वास सारंग,पूर्व मंत्री अरविंद भदौरिया,उज्जैन के सांसद अनिल फिरोजिया,खरगोन सांसद गजेंद्र पटेल,पूर्व सांसद केपी यादव को भी जिम्मेदारियां सौंप कर एक बात तो साबित कर दी कि मध्य प्रदेश का मॉडल भाजपा के लिए पूरे राज्यों में अनुकरणीय है..और अब आगामी विधानसभा चुनाव में बिहार में भी भाजपा का मध्य प्रदेश मॉडल दिखाई देगा..क्योंकि भाजपा के वो शीर्ष दिग्गज जिन्होंने मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनाने में संगठन कौशल का लोहा मनवा कर संगठन को मजबूत किया और दो दशक से भाजपा का झंडा बुलंद किया अब वह बिहार का रुख कर चुके हैं..अब देखना होगा कि बिहार में यह मध्य प्रदेश के गेम चेंजर नेता क्या चेंज ला पाते हैं?
मप्र बीजेपी के नेता..और बिहार मैनेजमेंट!(बात पते की..(महेंद्र विश्वकर्मा)