नक्सलियों ने सरकार से वार्ता और सरेंडर का प्रस्ताव रखा
देश में नक्सलवाद से जुड़े एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में, नक्सलियों की केंद्रीय कमेटी ने सरकार के सामने हथियार डालने और सरेंडर करने की इच्छा व्यक्त की है। भाकपा (माओवादी) ने एक प्रेस रिलीज जारी कर यह घोषणा की कि संगठन फिलहाल हथियारबंद संघर्ष को रोकने और शांति वार्ता के लिए तैयार है।
सरकार से की गई अहम मांग
प्रेस रिलीज में यह भी कहा गया कि वार्ता प्रक्रिया के दौरान जेल में बंद माओवादी नेताओं को भी शामिल करने का अवसर दिया जाए। इसके साथ ही, संगठन ने आग्रह किया है कि इस अवधि में पुलिस द्वारा किसी भी प्रकार का दबाव न बनाया जाए।
पृष्ठभूमि और मौजूदा स्थिति
संगठन ने बताया कि 2024 से चल रहे अभियान में पुलिस और सुरक्षा बलों के साथ कई मुठभेड़ें हुई हैं, जिसमें दोनों पक्षों को नुकसान पहुंचा है। इसी के मद्देनजर, संगठन ने अगले एक महीने तक सरकार से संवाद प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है।
सरकारी प्रतिक्रिया
बस्तर के आईजी सुंदरराज पी ने कहा कि नक्सलियों के इस प्रस्ताव की फिलहाल जांच की जा रही है। उन्होंने यह भी पुष्टि की कि प्रेस नोट में दिखाई गई तस्वीर नक्सली नेता अभय की है।
गृह मंत्रालय का रुख
गौरतलब है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 2024 में रायपुर में वामपंथी उग्रवाद पर समीक्षा बैठक के दौरान कहा था कि मार्च 2026 तक देश से नक्सलवाद को पूरी तरह समाप्त करने की योजना है।
यह प्रस्ताव सरकार और नक्सलियों के बीच लंबे समय से चली आ रही हिंसा को समाप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। अब देखना यह होगा कि सरकार इस पर क्या प्रतिक्रिया देती है और वार्ता प्रक्रिया किस दिशा में आगे बढ़ती है।