पंजाब कांग्रेस में चन्नी बनाम हाईकमान का विवाद
चन्नी के दबाव के बावजूद हाईकमान अड़ा
पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत चन्नी ने कांग्रेस प्रभारी भूपेश बघेल के सामने 3 सांसद, 9 विधायक और 92 नेताओं की परेड कराई है। इसके बावजूद कांग्रेस हाईकमान उनके दबाव में नहीं आ रहा है।
हाईकमान के अड़ने की वजह
2022 का विधानसभा चुनाव और उसके बाद का 8 महीने का समय इसकी बड़ी वजह है। चन्नी की अगुआई में पार्टी बुरी तरह हारी और वह खुद दो सीटों से हार गए। इसके बाद वह संगठन छोड़कर करीब 9 महीने विदेश चले गए।
राजा वड़िंग पर भरोसा
हाईकमान राजा वड़िंग को प्रधान बनाए रखना चाहता है। 2022 में AAP की लैंडस्लाइड जीत के बाद राजा वड़िंग इकलौते कांग्रेस उम्मीदवार थे जिन्होंने गिद्दड़बाहा से जीत हासिल की। वह साढ़े चार साल से संगठन चला रहे हैं।
बघेल की रिपोर्ट
पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल ने अपनी रिपोर्ट में राजा वड़िंग के पक्ष में बातें लिखी हैं। चन्नी गुट वड़िंग को हटाने की मांग पर अड़ा है, जबकि वड़िंग चन्नी और रंधावा को सीनियर नेता बताते रहे हैं।
चन्नी खेमे की रणनीति
चन्नी खेमा राहुल गांधी से मुलाकात करना चाहता है। उन्हें लगता है कि बघेल ने एकतरफा रिपोर्ट पेश की है। चन्नी और रंधावा सीनियर नेताओं के संपर्क में हैं ताकि राहुल गांधी से मीटिंग फिक्स हो सके।
Sachin Saxena