राम मंदिर में चढ़ावा चोरी की रिपोर्ट मोहन भागवत को भेजी गई
अयोध्या राम मंदिर में हुए कथित चढ़ावा चोरी की रिपोर्ट राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत को भेज दी गई है। यह रिपोर्ट पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्र प्रचारक अनिल कुमार ने तैयार की है। सूत्रों के अनुसार, क्षेत्र प्रचारक ने अपनी रिपोर्ट में राम मंदिर की व्यवस्थाओं, ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और चढ़ावा चोरी का पूरा ब्योरा दिया है।
ट्रस्ट में फेरबदल की तैयारी, नए संतों की एंट्री संभव
अयोध्या में 6 जुलाई को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की एक बड़ी बैठक होने वाली है। इस बैठक में संघ की रिपोर्ट के आधार पर कई अहम फैसले लिए जा सकते हैं। चढ़ावा विवाद के बाद संघ ने ट्रस्ट पदाधिकारियों से दूरी बनाने का मन बना लिया है। कुछ पदाधिकारियों के अधिकार सीमित करने और नई जिम्मेदारियां तय करने पर चर्चा चल रही है। चंपत राय और अनिल मिश्र के इस्तीफे के बाद अब गोपाल राव को लेकर भी 6 जुलाई की बैठक में फैसला हो सकता है।
ट्रस्ट के पुनर्गठन का ब्लूप्रिंट तैयार
सूत्रों के अनुसार, 15 सदस्यीय श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पुनर्गठन पर भी विचार शुरू हो गया है। ट्रस्ट में संत समाज की भागीदारी को और मजबूत करने की बात चल रही है। पश्चिम भारत, विशेषकर नासिक क्षेत्र से जुड़े संघ की पृष्ठभूमि वाले एक प्रतिष्ठित धर्माचार्य और अयोध्या के किसी प्रमुख संत को ट्रस्ट में शामिल करने का प्रस्ताव चर्चा में है।
स्वामी वासुदेवाचार्य विद्याभास्कर:अयोध्या के संत समाज में जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी वासुदेवाचार्य विद्याभास्कर का नाम सबसे ऊपर माना जा रहा है। वे प्रतिष्ठित वैदिक विद्वानों में गिने जाते हैं और रामानुज परंपरा के प्रमुख संतों में उनकी पहचान है।
स्वामी राजकुमार दास:श्रीरामवल्लभाकुंज के प्रमुख स्वामी राजकुमार दास महाराज का नाम भी प्रमुख है। वे मणिराम दास छावनी से जुड़े हैं और संत समाज में उनकी छवि संयमित, शांत और विवादों से दूर रहने वाले संत की रही है।
कृष्णमोहन की बढ़ सकती है भूमिका
ट्रस्ट सदस्य कृष्णमोहन को ट्रस्ट में बड़ी प्रशासनिक जिम्मेदारी दिए जाने पर विचार किया जा रहा है। माना जा रहा है कि राम मंदिर की व्यवस्थाओं में उनकी भूमिका बढ़ सकती है।
ट्रस्ट में कौन कितना सक्रिय?
वर्तमान में ट्रस्ट में संत समाज के छह प्रमुख प्रतिनिधि हैं, लेकिन सक्रिय भागीदारी कुछ चुनिंदा चेहरों तक ही सीमित है। ट्रस्ट अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास लंबे समय से अस्वस्थ हैं। कोषाध्यक्ष गोविंददेव गिरि और स्वामी विश्वप्रसन्न तीर्थ मंदिर से जुड़े प्रमुख कार्यक्रमों, बैठकों और धार्मिक आयोजनों में लगातार सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं।
कोषाध्यक्ष की भूमिका पर भी चर्चा
दान संबंधी विवादों के बाद ट्रस्ट की वित्तीय व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठे हैं। मंदिर के बढ़ते आकार और करोड़ों रुपए के दान को देखते हुए वित्तीय प्रबंधन में और अधिक समय और निगरानी की आवश्यकता है। सूत्रों के मुताबिक इसी कारण कोषाध्यक्ष की भूमिका और व्यवस्था की भी समीक्षा की जा रही है।
Sachin Saxena