राष्ट्रपति और राज्यपालों के बिल मंजूरी पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को राष्ट्रपति और राज्यपालों के बिलों पर हस्ताक्षर करने के लिए समयसीमा लागू करने की याचिका पर सुनवाई हुई। इस मामले में केंद्र सरकार और विभिन्न राज्यों ने दलील दी कि यह अदालत का अधिकार क्षेत्र नहीं है। संविधान के तहत राष्ट्रपति और राज्यपालों को बिलों पर निर्णय लेने का विशेषाधिकार है।
तमिलनाडु से उठा विवाद
यह मामला तमिलनाडु में राज्यपाल और राज्य सरकार के बीच हुए विवाद से शुरू हुआ, जहां राज्यपाल ने कुछ बिलों को रोक रखा था। सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले कहा था कि राज्यपाल के पास वीटो पावर नहीं है और राष्ट्रपति को तीन महीने के भीतर निर्णय लेना होगा।
अगली सुनवाई 28 अगस्त को
मंगलवार की सुनवाई में केंद्र ने कोर्ट से कहा कि बिलों पर निर्णय के लिए समयसीमा तय करना संसद का काम है। अदालतों को सभी समस्याओं का समाधान नहीं करना चाहिए। मामले की अगली सुनवाई 28 अगस्त को होगी, जिसमें तमिलनाडु और केरल सरकार अपनी दलीलें पेश करेंगी।