दीपम रायचुरा का निलंबन: फर्जी FDR, बिना लाइसेंस ट्रांसफर और रिश्वत के आरोप
सस्पेंशन के कारण और जांच के मुख्य बिंदु
मध्यप्रदेश के डिप्टी CM जगदीश देवड़ा के OSD दीपम रायचुरा को आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना ने सोमवार रात को निलंबित किया। यह कदम शराब दुकान टेंडर में गड़बड़ी उजागर होने के बाद पहले ही हटाए जाने के बाद लिया गया। जांच में पता चला कि रायचुरा ने 2.75 करोड़ रुपए की फर्जी FDR स्वीकार की और बिना पार्टनरशिप डीड लाइसेंस ट्रांसफर के कार्यवाही की। इसके अलावा, उन्हें भोपाल में दो शराब दुकानें दिलाने के बदले 1 करोड़ रुपए की रिश्वत लेने का आरोप भी लगा।
फर्जी FDR, सुरक्षा जमा और लाइसेंस ट्रांसफर की अनियमितताएँ
जांच में पाया गया कि AU स्मॉल फाइनेंस बैंक की 2 करोड़ 75 लाख 53 हजार 535 रुपए की FDR 12 मई 2024 को स्वीकार की गई थी, पर बैंक ने बताया कि उसने यह FDR जारी ही नहीं की थी। सत्यापन की जिम्मेदारी आबकारी उपनिरीक्षक वर्षा उइके पर थी, जिन्हें सत्यापन पत्र नहीं मिला। FDR पर बैंक की शाखा का नाम भी नहीं था, फिर भी लाइसेंसी जसवंत के ईमेल से मिली सत्यापन रिपोर्ट स्वीकार कर ली गई। दोनों FDR और सत्यापन रिपोर्ट फर्जी निकलीं।
इसके अलावा, 1 करोड़ 37 लाख 76 हजार 768 रुपए की नकद राशि 50% सिक्योरिटी के रूप में जमा होनी थी, पर यह राशि 22 दिन देर से जमा हुई। देर पर कोई कार्रवाई नहीं की गई और दूसरी सिक्योरिटी लिए बिना ही राशि समायोजित कर ली गई।
मेसर्स मां माइंस के लाइसेंस ट्रांसफर में भी गड़बड़ी सामने आई। ट्रांसफर 10 जुलाई 2024 को हुआ, जबकि कलेक्टर भोपाल का आदेश 27 दिसंबर 2024 को जारी हुआ। ट्रांसफर से पहले पार्टनरशिप डीड नहीं ली गई, और आदेश में विजय सिंह को भागीदार बताया गया, पर सप्लीमेंट्री पार्टनरशिप डीड में उनका नाम नहीं था। फिर भी विजय सिंह की 76 लाख रुपए की बैंक गारंटी स्वीकार कर ली गई, जो ICICI बैंक, नेहरू नगर, भिलाई से थी।
जांच में पाया गया कि विजय सिंह न तो मूल लाइसेंसधारी थे और न ही फर्म के भागीदार, और उनका फर्म से कोई लिखित संबंध नहीं था। इसके अलावा, उनके व्यक्तिगत बैंक खाते से चेक स्वीकार करने पर भी सवाल उठे, जिससे सरकारी राजस्व की वसूली ऐसे व्यक्ति पर निर्भर हो गई, जिसका लाइसेंसी फर्म से कानूनी संबंध नहीं था। प्रताप धाकड़ और विजय सिंह को मेसर्स मां माइंस और बिलखरिया कंपोजिट शराब दुकान का भागीदार या लाइसेंसी बताया गया, जबकि वे न फर्म के मालिक थे और न ही सप्लीमेंट्री पार्टनरशिप डीड में उनका नाम था। इसी तरह आशीष धाकड़
Arvind Vishwakarma