सिंधिया राजपरिवार संपत्ति विवाद: 41 हजार करोड़ की सुनवाई और समझौते पर कानूनी पेच
सुनवाई और आरोप-प्रत्यारोप
अतिरिक्त सत्र न्यायालय (एडीजे) में बुधवार 14 अक्टूबर 2026 को अंतरिम आवेदन और आपत्ति आवेदन पर बहस होनी है। सात दिन पहले भी इन आवेदनों पर बहस हुई थी। बुधवार को सुनवाई के बाद अदालत तय करेगी कि आगे की सुनवाई अंतरिम आवेदनों पर होगी या प्रतिमा देवी की आपत्ति स्वीकार कर साक्ष्य पर मामला बढ़ाया जाएगा। बुधवार शाम तक सिंधिया राजघराने की पूरे देश में फैली संपत्ति को लेकर बड़ा फैसला आ सकता है।
प्रतिमा देवी राना (दिवंगत पद्मावती राजे की बेटी) ने समझौता प्रस्ताव पर आपत्ति आवेदन दायर कर आरोप लगाया है कि उनसे धोखाधड़ी कर समझौते पर हस्ताक्षर कराए गए हैं। उन्होंने केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, वसुंधरा राजे, यशोधरा राजे और उषा राजे पर धोखाधड़ी से हस्ताक्षर कराने का आरोप लगाया है।
प्रतिमा देवी की आपत्ति का जवाब तीनों मौसियों (वसुंधरा राजे, यशोधरा राजे, उषा राजे) ने न्यायालय में दिया है। उनका कहना है कि हस्ताक्षर सहमति से हुए हैं। हस्ताक्षर के बाद सभी वहां रुके, फिर फैमिली डिनर हुआ और आखिर में फोटोग्राफ्स भी लिए गए। ज्योतिरादित्य सिंधिया की ओर से भी पक्ष रखा गया कि हस्ताक्षर सहमति से ही हुए हैं और इसमें कोई गड़बड़ी नहीं की गई है।
पृष्ठभूमि, राजीनामा और महत्वपूर्ण दस्तावेज
वसुंधरा राजे, उषा राजे और यशोधरा राजे ने ज्योतिरादित्य सिंधिया से पैतृक संपत्ति में अपना हिस्सा पाने के लिए सिविल सूट दायर किया था। लंबे कानूनी विवाद के बाद हाल ही में दोनों पक्षों ने आपसी सहमति से एक राजीनामा तैयार कर कोर्ट में पेश किया था। मूल दावे में दिवंगत बड़ी बुआ पद्मावती राजे की दोनों बेटियों कनिका देवी सिंह और प्रतिमा देवी राना को पक्षकार बनाया गया था, लेकिन पूर्व में सुनवाई के दौरान उपस्थित न होने के कारण अदालत ने उन्हें 'एक्स पार्टी' (एकपक्षीय) घोषित कर दिया था।
अब प्रतिमा देवी ने कोर्ट में आवेदन देकर प्रक्रिया में दोबारा शामिल होने और समझौते में अपना हक पाने की गुहार लगाई है। साथ ही वर्तमान समझौता प्रस्ताव पर आपत्ति जताई है। पद्मावती राजे भी संपत्ति में बराबर की हिस्सेदार थीं, इसलिए उनकी बेटियों को छोड़े जाने से यह राजीनामा कानूनी रूप से पेचीदा हो गया है।
ग्वालियर के सिंधिया राजघराने की ₹41 हजार करोड़ से अधिक की अचल संपत्तियों के बंटवारे को लेकर ग्वालियर जिला कोर्ट में कानूनी जंग चल रही है। इस केस के पटाक्षेप के लिए 78 साल पुराना विलय पत्र यानी 'द कोवेनेंट' सबसे अहम दस्तावेज बनकर सामने आया है। दिल्ली के नोटरी द्वारा सर्टिफाइड ट्रू कॉपी के रूप में प्रमाणित यह दस्तावेज कोर्ट के सामने आ चुका है, जिसमें मध्य भारत की रियासतों के विलय, निजी संपत्तियों और राजाओं को मिलने वाले टैक्स फ्री 'प्रिवी पर्स' (वार्षिक भत्ते) का पाई-पाई का ब्योरा दर्ज है।
Amit Pateria