सोनिया गांधी की मोदी सरकार पर इजराइल-फिलिस्तीन नीति को लेकर आलोचना

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सोनिया गांधी की मोदी सरकार पर इजराइल-फिलिस्तीन नीति को लेकर आलोचना

सोनिया गांधी ने मोदी सरकार की इजराइल-फिलिस्तीन नीति की आलोचना की

कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने इजराइल-फिलिस्तीन संघर्ष पर भारत की वर्तमान विदेश नीति को लेकर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने इसे भारत की पुरानी नैतिक और मानवीय विदेश नीति से अलग बताते हुए सरकार की चुप्पी को गहरी चिंता का विषय कहा।

भारत को नेतृत्व करने की सलाह

सोनिया गांधी ने कहा कि भारत को इजराइल-फिलिस्तीन संघर्ष के समाधान में प्रमुख भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत का मौजूदा रुख प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की व्यक्तिगत दोस्ती से प्रभावित लग रहा है। उनके अनुसार, विदेश नीति व्यक्तिगत संबंधों पर आधारित नहीं होनी चाहिए, बल्कि नैतिक सिद्धांतों पर आधारित होनी चाहिए।

दुनिया के समर्थन का जिक्र

गांधी ने बताया कि दुनिया के 193 में से 150 से अधिक देश फिलिस्तीन को एक स्वतंत्र राज्य के रूप में मान्यता दे रहे हैं। यह उन लोगों की उम्मीदों और सपनों को मान्यता देने का एक ऐतिहासिक कदम है, जो लंबे समय से संघर्ष और पीड़ा झेल रहे हैं। इसके विपरीत, भारत ने हाल ही में इजराइल के साथ निवेश समझौता किया और उसके दक्षिणपंथी मंत्री की मेजबानी की, जिसकी आलोचना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो रही है।

गाजा की स्थिति पर चिंता

सोनिया गांधी ने गाजा में हो रही हिंसा और मानवीय संकट पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि अक्टूबर 2023 से शुरू हुई हिंसा में 55 हजार से ज्यादा फिलिस्तीनी नागरिक मारे गए हैं, जिनमें 17 हजार बच्चे शामिल हैं। गाजा के स्कूल, अस्पताल और घर पूरी तरह से नष्ट हो गए हैं। वहां के लोग अब अकाल जैसी स्थिति में जी रहे हैं।

उन्होंने इजराइली सेना पर भोजन, दवा और अन्य जरूरी सामान की आपूर्ति रोकने का आरोप लगाया। उन्होंने यह भी कहा कि जब नागरिक भोजन लेने जाते हैं, तो उन पर गोलियां चलाई जाती हैं, जिससे यह स्थिति और भी अमानवीय बन जाती है।

भारत के लिए नैतिक जिम्मेदारी

गांधी ने कहा कि पहले भारत दुनिया में मानवाधिकार और न्याय की आवाज बुलंद करता था, लेकिन आज वह इस मुद्दे पर चुप है। उनके अनुसार, यह केवल एक विदेश नीति का मामला नहीं है, बल्कि भारत की नैतिक और सभ्यतागत जिम्मेदारी है।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत को इजराइल या फिलिस्तीन में से किसी एक का समर्थन करने के बजाय सत्य और सिद्धांतों का पक्ष लेना चाहिए। चुप रहना, अन्याय का समर्थन करने के बराबर है। उन्होंने कहा कि भारत को अपने मूल्यों और आजादी की विरासत के अनुरूप फिलिस्तीन के पक्ष में नेतृत्व करना चाहिए।

निष्कर्ष

सोनिया गांधी ने इजराइल-फिलिस्तीन संघर्ष पर भारत की भूमिका को लेकर अहम सवाल उठाए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत की विदेश नीति को सदैव नैतिकता और मानवता के आधार पर संचालित होना चाहिए। सोनिया ने भारत की पुरानी विदेश नीति पर लौटने और फिलिस्तीन के समर्थन में नेतृत्व करने की अपील की।