थरूर ने रिजिजू के आरोपों का जवाब दिया
थरूर का वक्तव्य
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सोमवार को केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के सत्ता परिवर्तन कराने के आरोपों का जवाब दिया। थरूर ने कहा कि भारत न बांग्लादेश है और न ही फ्रांस, और यह तुलना उन्हें प्रासंगिक नहीं लगती।
उन्होंने स्पष्ट किया कि वे फ्रांस में बसों और पुलिस स्टेशनों को आग लगाने जैसी किसी भी हिंसा को कभी सही नहीं ठहराएंगे और केवल शांतिपूर्ण प्रदर्शन में विश्वास करते हैं; उन्होंने खुद भी ऐसे प्रदर्शनों में भाग लिया है और मानते हैं कि विपक्ष सामान्यतः इसी का समर्थन करता है।
थरूर ने कहा कि ‘रिजीम चेंज’ जैसे शब्दों को तोड़-मरोड़कर पेश करने का कोई मतलब नहीं है और इसका किसी सरकार को गिराने या सत्ता परिवर्तन की कोशिश से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र किसी की ओर से दिया गया उपहार नहीं है, बल्कि भारत के आम नागरिक इसके संरक्षक हैं और हर नागरिक को अपने लोकतंत्र की रक्षा करने का अधिकार है।
थरूर ने चुनाव आयोग जैसी संस्थाओं से अपेक्षा की कि वे जिम्मेदारी से काम करें और संविधान के तहत जो करना चाहिए वही करें; उन्होंने कहा कि वे संस्थाओं को चुनौती नहीं दे रहे बल्कि उनके कामकाज और आचरण पर सवाल उठा रहे हैं और यह चिंता का विषय है।
उन्होंने बताया कि बड़ी संख्या में लोगों के नाम मतदाता सूची से एक बेहद परेशान करने वाली, अनियमित और आंशिक रूप से अवैध प्रक्रिया के कारण हटाए गए हैं, इसलिए वे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की पूरी प्रक्रिया को वापस लेने की मांग कर रहे हैं; उन्होंने इसे संवैधानिक मुद्दा बताया और कहा कि इसका किसी सरकार को गिराने से कोई संबंध नहीं है।
रिजिजू के आरोप और घटनाक्रम
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने रविवार को आरोप लगाया कि फ्रांस और बांग्लादेश में हुई हिंसक घटनाओं जैसी साजिश भारत में भी रची गई थी और कुछ नेताओं ने युवाओं को भड़काकर सड़कों पर हिंसा फैलाने की कोशिश की।
18 अक्टूबर को रिजिजू ने X पर एक पोस्ट के अलावा एक वीडियो साझा किया जिसमें राहुल गांधी और नेहा बोरा दिखाई दे रहे हैं।
14 अक्टूबर को नेहा बोरा का बांग्लादेश में हुए हिंसक प्रदर्शन के समर्थन वाला वीडियो सामने आया था; उन्होंने बांग्लादेश के सोशलिस्ट स्टूडेंट्स फ्रंट (SSF) के छठे सेंट्रल कॉन्फ्रेंस के लिए एक वीडियो संदेश भेजा जिसमें कहा कि भारत का जेन-जी आंदोलन बांग्लादेश के आंदोलन से प्रेरित है और SSF बांग्लादेश के छात्र आंदोलन और तख्तापलट के घटनाक्रमों में सक्रिय था।
नेहा बोरा ने अपने संदेश में कहा कि बांग्लादेश में शुरू हुआ आंदोलन लोकतंत्र और मतदाताओं के अधिकारों के लिए था और भारत में युवा जिस आंदोलन में हिस्सा ले रहे हैं वह भी उन्हीं अधिकारों की रक्षा की लड़ाई है; उन्होंने धार्मिक कट्टरपंथ के खिलाफ लड़ाई, ढाका यूनिवर्सिटी और जहांगीर यूनिवर्सिटी की स्थिति, भारत में संस्थानों और केंद्रीय विश्वविद्यालयों की स्थिति, शिक्षा के निजी
Pushpendra Chaubey