मुख्यमंत्री कीवाले तबादले 31 मई तक नहीं किए गए थे, भले ही मोहन कैबिनेट में इस आशय का निर्णय लिया गया था। सामान्य प्रशासन विभाग ने तबादला नीति में भी इसका उल्लेख किया है। हालांकि, 1 जून को तबादलों पर से प्रतिबंध हटने के बाद भी यह प्रक्रिया जारी है।
<उच्च पद प्रभार और तबादले>
जनजातीय कार्य विभाग ने उपयंत्री से सहायक यंत्री पद पर चार अफसरों की पोस्टिंग की और उन्हें दूसरे जिलों में भेजा। पुलिस मुख्यालय ने भी 5 जून तक उच्च पद का प्रभार देने के निर्देश जारी किए हैं, जिसमें सब इंस्पेक्टर तक के तबादले शामिल हैं। महिला और बाल विकास विभाग ने भी 5 जून तक अधिकारियों और कर्मचारियों से ऑनलाइन आवेदन मांगे हैं।
<विभाग प्रमुखों द्वारा अनदेखी>
सामान्य प्रशासन विभाग की तबादला नीति में स्पष्ट था किवाले तबादले 31 मई तक कर लिए जाएं। इसके बावजूद, विभाग प्रमुखों ने इसका पालन नहीं किया। कैबिनेट के निर्देश के बाद भी इन तबादलों को लंबित रखा गया।
<उच्च शिक्षा विभाग की समस्या>
उच्च शिक्षा विभाग को ई-एचआरएमएस पोर्टल पर डेटा अपडेट करने में दिक्कत आ रही है। इस समस्या के समाधान के लिए ऑनलाइन बैठक आयोजित की जाएगी, ताकि नियमित पदों के विरुद्ध कर्मचारियों और अधिकारियों की पदस्थापना का डेटा अपलोड किया जा सके।
<स्कूल शिक्षा विभाग की नई नीति>
स्कूल शिक्षा विभाग ने अपनी नई तबादला नीति में स्पष्ट किया है कि जिन शिक्षकों की ई-अटेंडेंस 90 प्रतिशत से कम है, उन्हें तबादले की पात्रता नहीं मिलेगी। अप्रैल तक के ई-अटेंडेंस के आधार पर पात्रता तय की जा रही है। जिन शिक्षकों के संविलियन के बाद तीन वर्ष पूरे नहीं हुए हैं, वे भी इस प्रक्रिया में शामिल नहीं हो सकेंगे।
<तबादलों का दौर शुरू>
प्रदेश में आज से तबादलों का दौर शुरू हो गया है। 15 जून तक सभी विभाग स्वैच्छिक और प्रशासनिक आधार पर अधिकारी-कर्मचारियों के तबादले कर सकेंगे। पुलिस मुख्यालय के निर्देशों के बाद जिलों में एसपी और पुलिस आयुक्तों ने बदलाव शुरू कर दिए हैं।
Bhavanesh Soni