आधार कार्ड का इस्तेमाल सिर्फ पहचान के लिए हो: सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई आज
सुप्रीम कोर्ट आज आधार कार्ड के इस्तेमाल को लेकर दाखिल की गई जनहित याचिका पर सुनवाई करेगा। याचिका में कहा गया है कि आधार कार्ड का इस्तेमाल पहचान पत्र से आगे बढ़कर नागरिकता, निवास और जन्म तारीख के प्रमाण के रूप में किया जा रहा है, जबकि कानून इसकी अनुमति नहीं देता।
याचिका में क्या कहा गया है?
अश्विनी कुमार उपाध्याय की तरफ से दायर याचिका में मांग की गई है कि आधार कार्ड के इस्तेमाल को सिर्फ पहचान की पुष्टि तक सीमित करने के निर्देश दिए जाएं। याचिका में यह निर्देश देने की भी मांग की गई है कि नए वोटर रजिस्ट्रेशन के लिए एप्लीकेशन फॉर्म में जन्म तिथि और निवास के सबूत के तौर पर आधार का इस्तेमाल, आधार एक्ट 2016 की धारा 9, RPA 1950 की धारा 23(4) और संविधान के अनुच्छेद 14 के खिलाफ माना जाए। चीफ जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस वी मोहना की बेंच इस मामले की सुनवाई कर सकती है।
याचिकाकर्ता के मुख्य तर्क
सुझाए गए सुधार
याचिका में चुनावी प्रक्रिया में इस्तेमाल होने वाले सत्यापन ढांचे में व्यापक सुधार की मांग की गई है। इसके साथ ही एक उच्चस्तरीय निगरानी समिति बनाए जाने का सुझाव दिया गया है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के रिटायर जज, साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ और फॉरेंसिक विशेषज्ञ शामिल हों।
2018 का सुप्रीम कोर्ट का फैसला
26 सितंबर 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने आधार अधिनियम को संवैधानिक माना था, लेकिन कुछ प्रावधानों को रद्द कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि बैंक खाते और मोबाइल सिम से आधार लिंक करना अनिवार्य नहीं है, साथ ही स्कूल एडमिशन के लिए भी आधार अनिवार्य नहीं है। हालांकि, सरकारी सब्सिडी और कल्याणकारी योजनाओं में आधार का उपयोग वैध है।
आधार अधिनियम, 2016
आधार (वित्तीय और अन्य सब्सिडी, लाभ एवं सेवाओं की लक्षित डिलीवरी) अधिनियम, 2016 वह कानून है जिसके तहत आधार संख्या जारी करने, उसके उपयोग, डेटा की सुरक्षा और UIDAI के कामकाज का कानूनी ढांचा तय किया गया है। इस अधिनियम में स्पष्ट किया गया है कि आधार नागरिकता का प्रमाण नहीं है, बल्कि यह केवल यह दर्शाता है कि व्यक्ति भारत का निवासी है।
Arvind Vishwakarma