अमेरिका-ईरान शांति समझौते पर डिजिटल हस्ताक्षर, जेनेवा में औपचारिक डील

· 1 min read
अमेरिका-ईरान शांति समझौते पर डिजिटल हस्ताक्षर, जेनेवा में औपचारिक डील

अमेरिका-ईरान शांति समझौता: डिजिटल हस्ताक्षर हुए, जेनेवा में औपचारिक डील 19 जून को

समझौते की मुख्य बातें और पक्ष

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि अमेरिका-ईरान समझौता पूरा हो चुका है और इस पर शुक्रवार, 19 जून को स्विट्जरलैंड के जेनेवा में औपचारिक हस्ताक्षर होंगे। ट्रम्प के अनुसार, अमेरिकी डेलिगेशन की अगुआई उपराष्ट्रपति जेडी वेंस करेंगे। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि ट्रम्प, जेडी वेंस और ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ डिजिटल रूप से समझौते पर हस्ताक्षर कर चुके हैं। हालांकि, समझौते का पूरा मसौदा अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है और इसे शुक्रवार के बाद जारी किया जाएगा।

मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि दोनों देशों के बीच 14 पॉइंट वाला एक शुरुआती मसौदा तैयार हुआ है, जिस पर आगे तकनीकी स्तर की बातचीत होगी। कुछ रिपोर्टों के अनुसार, ईरान को आर्थिक सहायता के लिए करीब 28 लाख करोड़ रुपए का पैकेज मिल सकता है, हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

समझौते पर प्रमुख अपडेट्स:

समझौते को लेकर अमेरिकी सरकार में मतभेद

पश्चिम एशिया में युद्ध खत्म करने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच हुए प्रारंभिक समझौते से ट्रम्प सरकार के भीतर मतभेद पैदा हो गया है। Axios की रिपोर्ट के मुताबिक, CIA चीफ जॉन रैटक्लिफ को शक है कि ईरान समझौते में किए गए सभी वादे निभाएगा या नहीं। विदेश मंत्री मार्को रुबियो का भी मानना है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर वे कदम उठाने के लिए तैयार नहीं है, जिनकी अमेरिका उम्मीद कर रहा है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने भी समझौते को लेकर चिंता जताई थी। वहीं, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर समझौते को आगे बढ़ाने के पक्ष में थे।

परमाणु जांचकर्ताओं की वापसी और यूरेनियम पर समझौता

अमेरिकी उपराष्ट्रपति वेंस ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय परमाणु निरीक्षकों को फिर से ईरान में काम करने की अनुमति दी जाएगी। वेंस ने NBC न्यूज से बातचीत में कहा कि यह अमेरिका-ईरान समझौते की सबसे अहम शर्तों में से एक है। समझौते में साफ तौर पर लिखा गया है कि IAEA, अमेरिका और ईरान मिलकर तेहरान के पास मौजूद एनरिच्ड यूरेनियम के भंडार को खत्म करने पर काम करेंगे। अंतरराष्ट्रीय परमाणु निरीक्षक संयुक्त राष्ट्र से जुड़ी संस्था अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के लिए काम करते हैं और यह जांच करते हैं कि कोई देश अपने परमाणु कार्यक्रम का इस्तेमाल सिर्फ शांतिपूर्ण मकसद के लिए कर रहा है या परमाणु हथियार बनाने की दिशा में बढ़ रहा है।

फ्रीज्ड फंड्स पर अलग-अलग दावे

फ्रीज्ड फंड को लेकर ईरान और अमेरिका अलग-अलग बातें कर रहे हैं। ईरानी मीडिया का दावा है कि समझौते के तहत ईरान को उसके 24 अरब डॉलर के फ्रीज्ड फंड्स वापस मिलेंगे, जिनमें से 12 अरब डॉलर 60 दिन की बातचीत शुरू होने से पहले जारी किए जाएंगे। अमेरिकी अधिकारियों और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इन खबरों का खंडन किया है। उनका कहना है कि सिर्फ समझौते पर हस्ताक्षर करने या बातचीत में शामिल होने के बदले ईरान को कोई पैसा नहीं मिलेगा। किसी भी आर्थिक राहत से पहले ईरान को अपनी प्रतिबद्धताएं पूरी करनी होंगी।

ट्रम्प ने Truth Social पर पोस्ट कर दावा किया कि ईरान कभी परमाणु हथियार नहीं रखने पर राजी हो गया है। ट्रम्प ने उन रिपोर्टों को भी खारिज कर दिया, जिनमें कहा गया था कि अमेरिका समझौते के तहत ईरान को 30 करोड़ डॉलर की आर्थिक सहायता देगा। उन्होंने कहा कि ऐसी खबरें पूरी तरह गलत हैं। इससे पहले खुद उपराष्ट्रपति वेंस ने सोमवार को कहा था कि अगर ईरान शांति समझौते में तय अपनी सभी जिम्मेदारियां पूरी करता है, तो उसे 30 करोड़ डॉलर का फंड मिल सकता है।

समझौते का भारत पर प्रभाव

ईरान-अमेरिका समझौते से भारत को फायदा होगा, क्योंकि वह जरूरत का 85% कच्चा तेल आयात करता है। क्रूड सस्ता होने से आयात बिल घटेगा, चालू खाता घाटा सुधरेगा और महंगाई काबू करने में मदद मिलेगी। महंगाई कम होने से ब्याज दरों में कटौती का रास्ता खुलेगा, जिससे लोन सस्ते होंगे।

क्रूड ​सस्ता होते ही रुपया डॉलर के मुकाबले 60 पैसे मजबूत होकर 94.58 के स्तर पर पहुंच गया, जो बीते एक महीने का सबसे मजबूत स्तर है। शुक्रवार को भी 67 पैसे मजबूत हुआ था। डील की घोषणा के बाद क्रूड ऑयल 5% सस्ता होकर 83 डॉलर प्रति बैरल हुआ। अमेरिकी क्रूड 80 डॉलर हुआ। 19 जून को डील पर साइन होते हैं तो कच्चा तेल 75 से 78 डॉलर पर आ सकता है।

भारत की 55% तेल और 90% एलपीजी की सप्लाई होर्मुज जलडमरूमध्य से होती है। अब यह मार्ग आसान होगा। डील के ऐलान के बाद होर्मुज से गुजरने वाला पहला गैस टैंकर ‘दिशा’ रहा, जो कतर से भारत पहुंचेगा।

युद्ध पर अमेरिकी खर्च और ईरान की प्रतिक्रिया

ईरान युद्ध में अमेरिका ने अब तक 10.75 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च किए हैं। सरकारी और रक्षा विशेषज्ञों (CSIS) के मुताबिक, अमेरिका ने इस युद्ध के लिए मिडिल ईस्ट में हजारों सैनिक भेजे हैं और समुद्र में 3 एयरक्राफ्ट करियर (विमानवाहक पोत) और उनके साथ पूरा नौसैनिक बेड़ा तैनात कर रखा है, जिसका रोजाना का मेंटेनेंस खर्च ही करोड़ों में है।

ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने अमेरिका के साथ हुए ऐतिहासिक समझौते के बाद ईरानी जनता और आर्म्ड फोर्स की तारीफ की। उन्होंने कहा कि महीनों तक चले संघर्ष के बाद देश ने आखिरी जीत की ओर एक बड़ा कदम बढ़ाया है। गालिबाफ ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि पीस डील ईरान की मजबूती का नतीजा है। उन्होंने कहा कि ईरान ने अपने हितों से समझौता किए बिना इस टकराव का सामना किया है।

इजराइल की चिंताएं और आगे की राह

इजराइल ईरान की बढ़ती ताकत को कुचलना चाहता है। वह लेबनान में ईरान समर्थक हिजबुल्ला और यमन में हूती विद्रोहियों पर हमले कर डील में बाधा पैदा कर सकता है।

ईरान ने परमाणु मुद्दे पर फिलहाल अपने 460 किलो परिष्कृत यूरेनियम को सौंपने का ऐलान नहीं किया है।

ईरान ओमान को साथ लेकर होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों से सर्विस टैक्स लेने पर अड़ा हुआ है, जबकि अमेरिका यहां पर टैक्स वसूली के विरुद्ध है।

अमेरिका और खाड़ी के देश ईरान के पुनर्निर्माण के लिए 28 लाख करोड़ के पैकेज पर आसानी से राजी नहीं होंगे। सऊदी अरब और UAE इसका विरोध करेंगे।

इजराइल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने सोमवार को कहा कि उनकी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। नेतन्याहू ने इस शांति समझौते को ‘ट्रम्प का फैसला’ बताया। उन्होंने कहा कि इजराइल अपनी जवाबी कार्रवाई की आजादी बनाए रखेगा। उनके मुताबिक, अगर हिजबुल्लाह का इजराइल पर हमला होता है तो वे लेबनान में जवाबी हमला जरूर करेंगे। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ट्रम्प को युद्ध शुरू करने के लिए मनाने में अहम भूमिका निभाई थी और अमेरिका के साथ मिलकर ईरान पर हमले कराए थे।

परमाणु जांचकर्ताओं की वापसी की पुष्टि

अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा है कि ईरान के साथ हुए समझौते के तहत अंतरराष्ट्रीय परमाणु जांचकर्ता (इंस्पेक्टर) फिर से ईरान जा सकेंगे। वेंस के मुताबिक, समझौते की सबसे महत्वपूर्ण शर्तों में से एक यह है कि इंटरनेशनल एटोमिक एनर्जी एजेंसी के विशेषज्ञ ईरान के परमाणु कार्यक्रम की निगरानी करेंगे। उन्होंने कहा कि अमेरिका और IAEA मिलकर ईरान के पास मौजूद उच्च संवर्धित यूरेनियम (परमाणु हथियार बनाने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री) को खत्म करने की दिशा में काम करेंगे। वेंस ने बताया कि इस प्रक्रिया के तरीके और समय-सीमा पर शुक्रवार को होने वाली बैठक में चर्चा होगी, जब समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर किए जाएंगे।

ट्रम्प की भागीदारी और जलमार्ग का खुलना

डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि शुक्रवार को होने वाले अमेरिका-ईरान शांति समझौते के हस्ताक्षर समारोह में वह शामिल भी हो सकते हैं और नहीं भी। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस कार्यक्रम में मौजूद रहेंगे। फ्रांस के एवियन में G7 शिखर सम्मेलन के दौरान फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ बैठक में उन्होंने यह बात कही है। फ्रांस पहुंचे ट्रम्प ने फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ बैठक में कहा- ईरान से अच्छी बातचीत चल रही है। समझौते पर हस्ताक्षर हो चुके हैं और जहाजों की आवाजाही फिर शुरू हो गई है। कुछ समुद्री बारूदी सुरंगें मिली हैं, जिन्हें हटाने का काम चल रहा है। इसके बावजूद जहाज निकलना शुरू हो गए हैं और शुक्रवार तक जलमार्ग पूरी तरह खुल जाएगा।

Adarsh Chaurasiya