अनुसूचित जनजाति के खिलाफ अपराध में 29% का इजाफा, मणिपुर सबसे प्रभावित
देशभर में अनुसूचित जनजाति (ST) समुदाय के खिलाफ अपराधों की बढ़ती संख्या पर चिंता बनी हुई है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, 2024 में इन अपराधों में 29 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो सामाजिक न्याय के लिए एक बड़ी चुनौती है।
देशभर में अपराध के आंकड़े
रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में ST समुदाय के खिलाफ कुल 12,960 मामले दर्ज किए गए, जबकि 2023 में यह संख्या 10,064 थी। इस प्रकार, मामलों में 28.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। मणिपुर इस सूची में सबसे अधिक प्रभावित राज्य के रूप में उभरा है, जहां 2023 में 3,399 मामले दर्ज किए गए। जबकि 2022 में मणिपुर में ऐसे मामलों की संख्या सिर्फ एक थी।
मणिपुर में जातीय हिंसा का प्रभाव
मणिपुर में, मैतेई और कुकी-ज़ो समुदायों के बीच जातीय हिंसा के चलते अनुसूचित जनजातियों के खिलाफ अपराधों में भारी वृद्धि हुई है। इन अपराधों में डकैती के 260 मामले, आगजनी के 1,051 मामले और धमकी देने के 203 मामले शामिल हैं।
अन्य प्रमुख राज्य
मणिपुर के बाद, मध्य प्रदेश और राजस्थान क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं। मध्य प्रदेश में 2,858 मामले दर्ज किए गए, जबकि राजस्थान में यह संख्या 2,453 रही। हालांकि, राजस्थान में 2022 की तुलना में मामलों में कमी देखी गई है।
महिलाओं के खिलाफ अपराध
NCRB की रिपोर्ट ने यह भी दिखाया कि महिलाओं के खिलाफ अपराधों में 2023 के दौरान 0.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। कुल 4,48,211 मामले दर्ज किए गए, जिनमें से सबसे अधिक मामले पति या रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता के थे।
सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव
आंकड़े देश में सामाजिक असमानता और प्रशासनिक विफलताओं की ओर इशारा करते हैं। अनुसूचित जातियों के खिलाफ अपराधों में मामूली वृद्धि (0.4 प्रतिशत) दर्ज की गई है, जबकि अनुसूचित जनजातियों के खिलाफ अपराधों में यह वृद्धि अत्यधिक चिंताजनक है।
निष्कर्ष
यह रिपोर्ट बताती है कि अनुसूचित जनजातियों के खिलाफ अपराध की रोकथाम के लिए न केवल कानून का सख्ती से पालन आवश्यक है, बल्कि समाज में जागरूकता अभियान और समानता की दिशा में ठोस कदम उठाने की भी जरूरत है।