अयोध्या बायपास पर पेड़ों की कटाई पर NGT की रोक, 8 जनवरी को अगली सुनवाई
भोपाल के अयोध्या बायपास को 10 लेन में बदलने के लिए प्रस्तावित 7871 पेड़ों की कटाई पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने रोक लगा दी है। यह रोक 8 जनवरी तक के लिए लगाई गई है, जब मामले की अगली सुनवाई होगी।
10 लेन योजना और पेड़ों की उम्र को लेकर आपत्ति
एनएचएआई की योजना के तहत आसाराम चौराहा से रत्नागिरि तिराहे तक लगभग 16 किलोमीटर लंबे अयोध्या बायपास को दस लेन का बनाया जाना है। पर्यावरणविदों का कहना है कि जिन पेड़ों को नगर निगम के माध्यम से काटा जा रहा है, उनकी उम्र 40 से 80 साल, और कुछ की उम्र 80 से 100 साल या उससे अधिक बताई जा रही है। उनका तर्क है कि नए लगाए जाने वाले पौधों को पेड़ बनने में कई साल लग जाएंगे, इसलिए मौजूदा हरियाली को बचाया जाए और 10 लेन की जगह अधिकतम 6 लेन की सड़क बनाई जाए।
एनजीटी की सुनवाई और निर्देश
इस मामले की सुनवाई एनजीटी की जस्टिस पुष्पा सत्यनारायणा और विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी की पीठ ने की। ट्रिब्यूनल ने कहा कि सीईसी कमेटी की बैठक के मिनट्स अभी तक स्पष्ट रूप से प्रस्तुत नहीं किए गए हैं, इसलिए अगली सुनवाई तक प्रोजेक्ट स्थल पर पेड़ों की कटाई या छंटाई नहीं की जाए। हालांकि, एनजीटी ने यह भी स्पष्ट किया कि एनएचएआई पेड़ों को काटे बिना सड़क परियोजना से जुड़े अन्य कार्य जारी रख सकता है। एनएचएआई का कहना है कि सीईसी बैठक के सभी मिनट्स एनजीटी के समक्ष पेश किए जा चुके हैं, फिर भी 8 जनवरी तक पेड़ कटाई पर लगी रोक के संबंध में वे अपना पक्ष रखेंगे।
पर्यावरणप्रेमियों का विरोध और प्रस्तावित आंदोलन
पेड़ों को बचाने के लिए पर्यावरणप्रेमी गुरुवार दोपहर 2 बजे काकड़ा फार्म हाउस, अयोध्या बायपास पर जुटेंगे और पेड़ों से लिपटकर उन्हें बचाने की अपील करेंगे। इंफ्रास्ट्रक्चर एक्सपर्ट सुयश कुलश्रेष्ठ का कहना है कि मौजूदा चार लेन सड़क को अधिकतम छह लेन तक बढ़ाना ही उचित है और 10 लेन की सड़क की आवश्यकता नहीं है। पर्यावरणविद उमाशंकर तिवारी का कहना है कि अयोध्या बायपास का इलाका काफी हरा-भरा है और पेड़ों की कटाई से हरियाली उजड़ जाएगी, इसलिए लोग बड़ी संख्या में इकट्ठा होकर विरोध दर्ज कराएंगे।
कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन
पेड़ों की कटाई के खिलाफ कांग्रेस ने भी दो दिन तक प्रदर्शन किया। सोमवार को अयोध्या बायपास पर कई पेड़ों की कटाई शुरू होने पर कांग्रेस नेता अभिनव बरोलिया ने मौके पर पहुंचकर विरोध जताया और कार्रवाई रोकने की मांग की। अगले दिन कांग्रेस जिलाध्यक्ष प्रवीण सक्सेना, रविंद्र साहू झूमरवाला सहित कई कार्यकर्ताओं ने मास्क पहनकर विरोध प्रदर्शन किया। उनका कहना है कि विकास के नाम पर हरियाली का विनाश स्वीकार नहीं है और एनएचएआई को तुरंत पेड़ों की कटाई रोकनी चाहिए।
एनएचएआई की योजना और तर्क
एनएचएआई की योजना के अनुसार 10 लेन सड़क बनाने के लिए कुल 7871 पेड़ काटे जाएंगे और बदले में लगभग 81 हजार पौधे लगाए जाएंगे। प्रस्तावित संरचना में मुख्य सड़क छह लेन की होगी, जबकि दोनों ओर दो-दो लेन की सर्विस रोड भी बनाई जाएगी, ताकि आसपास की कॉलोनियों के लोगों को आवागमन में सुविधा हो सके।
एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर देवांश नुवल के अनुसार, अयोध्या बायपास की क्षमता 40 हजार वाहनों प्रतिदिन की है, जबकि वर्तमान में वहां लगभग 45 हजार वाहन रोजाना गुजर रहे हैं। आसपास विकसित हो रही आवासीय कॉलोनियों से सीधे मुख्य मार्ग पर आने वाले वाहनों के कारण यातायात दबाव बढ़ा है और दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। इस मार्ग पर तीन ब्लैक स्पॉट चिह्नित किए गए हैं। सड़क के दोनों ओर सर्विस रोड बनने से स्थानीय वाहनों को अलग मार्ग मिलेगा और मुख्य कैरिज-वे पर दबाव कम होगा।
यातायात, डिजाइन और अनुमानित लाभ
एनएचएआई का कहना है कि पूरे बायपास को छह लेन में विकसित किया जा रहा है और इसका डिजाइन इस तरह तैयार किया गया है कि वह वर्ष 2050 तक के अनुमानित यातायात दबाव को संभाल सके। एजेंसी के अनुसार बेहतर और चौड़ी सड़क बनने से यात्रा समय में कमी, ईंधन की बचत और प्रदूषण में कमी आएगी। यह बायपास शहर के ट्रैफिक के साथ-साथ विदिशा, रायसेन, नर्मदापुरम और इंदौर से आने-जाने वाले भारी वाहनों के लिए भी प्रमुख मार्ग है, जहां अक्सर जाम और हादसे होते हैं। परियोजना के तहत करोंद, पीपुल्स मॉल और मीनाल के पास तीन बड़े फ्लाईओवर भी बनाए जाने हैं।
परियोजना की लागत और प्रगति
कुल लगभग 836.91 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना को दो साल में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। बायपास की लंबाई करीब 16 किलोमीटर है। एनएचएआई के अनुसार दिसंबर 2024 में टेंडर फाइनल हुआ और 11 अगस्त 2025 को कॉन्ट्रैक्ट किया गया। इसके बाद पेड़ कटाई का मुद्दा उठता रहा, जिस पर अब एनजीटी ने अंतरिम रोक लगाई है।
अगले कदम
अब 8 जनवरी को एनजीटी में होने वाली अगली सुनवाई तक पेड़ों की कटाई पर रोक जारी रहेगी। इस बीच पर्यावरणविद, स्थानीय निवासी और राजनीतिक दल पेड़ों को बचाने की मांग को मजबूती से उठा रहे हैं, जबकि एनएचएआई न्यायालय के निर्देशों के तहत परियोजना के अन्य कार्य आगे बढ़ाने की तैयारी में है।
Navjeet Kaur