बेगमगंज रेंज में मादा तेंदुए का शव मिलने से हड़कंप, शिकार की आशंका में तीन गिरफ्तार
मध्य प्रदेश के रायसेन जिले स्थित बेगमगंज रेंज की सुनेहरा बीट पीएफ 156 ए में एक नाले से मादा तेंदुए का शव मिलने से वन विभाग और स्थानीय क्षेत्र में हड़कंप मच गया। मामले में शिकार की आशंका के आधार पर तीन संदिग्ध व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया है और जांच जारी है।
नाले से मिला मादा तेंदुए का शव
शनिवार को सुनेहरा बीट के एक नाले में चार वर्षीय युवा मादा तेंदुए का शव देखा गया। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। मौके पर डीएफओ प्रतिभा शुक्ला, रेंजर अरविंद अहिरवार, नायब तहसीलदार विक्रम सिंह राजपूत, भोपाल से आई जांच टीम और अन्य वनकर्मी मौजूद रहे।
डॉग स्क्वॉड की मदद से तलाशी और खूंटियां बरामद
डीएफओ प्रतिभा शुक्ला के अनुसार, शव मिलने के बाद डॉग स्क्वॉड की मदद से आसपास के क्षेत्र में तलाशी अभियान चलाया गया। तलाशी के दौरान घटनास्थल से करीब 20 मीटर दूर एक खेत में बड़ी खूंटी मिली, जिस पर तेंदुए के बाल लगे पाए गए। पास के एक अन्य खेत से भी तीन खूंटियां बरामद की गईं। इन बरामद खूंटियों के आधार पर शिकार की आशंका मजबूत मानी जा रही है, हालांकि जांच जारी है।
तीन संदिग्धों पर मामला दर्ज कर कार्रवाई
डॉग स्क्वॉड की तलाशी और प्राथमिक जांच के आधार पर सुनेहरा निवासी बीरबल पाल (पिता दयाली पाल), पीर मोहम्मद (पिता हसन खां) और सलीम खां (पिता हसन खां) के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। इन संदिग्धों के खिलाफ सर्च वारंट जारी कर कार्रवाई की गई और उन्हें गिरफ्तार कर पूछताछ शुरू की गई है। पुलिस और वन विभाग यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या इन लोगों ने तेंदुए या अन्य वन्यप्राणियों के शिकार के लिए अपने खेतों में खूंटियां गाड़ी थीं।
तेंदुए के कारण क्षेत्र में फैला था दहशत का माहौल
स्थानीय लोगों के अनुसार, करीब पिछले पखवाड़े से बेगमगंज रेंज की सुनेहरा बीट में यह युवा मादा तेंदुआ घूम रहा था। ग्रामीणों का कहना है कि तेंदुआ पालतू पशुओं का शिकार कर रहा था, जिससे क्षेत्र में दहशत का माहौल बन गया था। तेंदुए के आतंक के कारण सुनेहरा, मड़िया, कोलुआ सहित आसपास के आठ गांवों के किसानों ने रात में खेतों पर जाना लगभग बंद कर दिया था और ग्रामीण भी रात के समय घरों से निकलने से बच रहे थे।
पोस्टमॉर्टम और अंतिम संस्कार, मौत का कारण अभी स्पष्ट नहीं
घटना के बाद मादा तेंदुए के शव का पोस्टमॉर्टम डीएफओ प्रतिभा शुक्ला और रेंजर अरविंद अहिरवार की उपस्थिति में कराया गया। यह प्रक्रिया वन विहार भोपाल के वन्यप्राणी चिकित्सक अतुल गुप्ता और डीपी अहिरवार ने, पशु चिकित्सक जयशंकर पाल की सहायता से पूरी की। पोस्टमॉर्टम के बाद तेंदुए के शव को बीट के डिपो में जलाकर अंतिम संस्कार कर दिया गया।
फिलहाल तेंदुए की मौत का सटीक कारण स्पष्ट नहीं हो सका है। वन विभाग और पुलिस दोनों मिलकर इस बात की जांच कर रहे हैं कि मौत शिकार के कारण हुई या किसी अन्य वजह से, और क्या पकड़े गए संदिग्धों का बरामद खूंटियों के माध्यम से संभावित शिकार से संबंध है या नहीं। आगे की रिपोर्ट और जांच के निष्कर्ष आने के बाद ही तेंदुए की मौत के कारण और जिम्मेदार लोगों की भूमिका पर अंतिम तस्वीर सामने आएगी।
Janmejay Chaturvedi