भारत-चीन के बीच डायरेक्ट फ्लाइट्स फिर से शुरू
भारत और चीन के बीच सीधी उड़ान सेवाएं 2020 में कोरोना महामारी के कारण बंद हो गई थीं। इसके बाद गलवान झड़प और अन्य तनावों के चलते यह सेवा लंबे समय तक निलंबित रही। अब करीब तीन वर्षों के बाद, इन उड़ानों को फिर से बहाल करने का निर्णय लिया गया है। विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को प्रेस रिलीज जारी कर इस पहल की जानकारी दी।
इंडिगो ने किया घोषणा
इस घोषणा के कुछ ही देर बाद एयरलाइन इंडिगो ने भी अपनी योजना का खुलासा किया। इंडिगो 26 अक्टूबर से भारत और चीन के बीच सीधी उड़ानें शुरू करेगी। शुरुआत में कोलकाता से ग्वांगझू के बीच रोजाना नॉन-स्टॉप उड़ानें चलाई जाएंगी। इसके अलावा, दिल्ली से ग्वांगझू के बीच भी सीधी उड़ानें जल्द शुरू होने की योजना है। इंडिगो इन सेवाओं के लिए अपने एयरबस A320neo विमानों का उपयोग करेगी।
कोविड के बाद बढ़ी ट्रैवलिंग लागत
कोरोना महामारी के बाद से भारत और चीन के नागरिक तीसरे देशों जैसे थाईलैंड, सिंगापुर और मलेशिया के जरिए यात्रा कर रहे थे। इससे यात्रा का समय और खर्च दोनों बढ़ गए थे। एक रिपोर्ट के अनुसार, इन कनेक्टिंग फ्लाइट्स की वजह से यात्रियों को अधिक खर्च उठाना पड़ता था। नई सीधी उड़ानें इस खर्च को 15-20% तक कम कर सकती हैं।
फ्लाइट्स का सर्दियों के मौसम से तालमेल
विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह उड़ानें सर्दियों के समय के अनुरूप चलाई जाएंगी। हालांकि, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि दोनों देशों की एयरलाइंस सभी आवश्यक तैयारियां पूरी करें। भारत और चीन के एयर सर्विस अधिकारियों ने कई महीनों की चर्चा के बाद इस फैसले पर सहमति बनाई है।
पिछले आंकड़ों पर एक नजर
कोरोना महामारी से पहले, भारत और चीन के बीच हर महीने 539 सीधी उड़ानें संचालित होती थीं, जिनमें 1.25 लाख से अधिक सीटों की क्षमता थी। एयर इंडिया, चाइना साउदर्न एयरलाइंस और चाइना ईस्टर्न एयरलाइंस जैसे प्रमुख विमानन कंपनियां इन सेवाओं का संचालन करती थीं। 2019 में जनवरी से अक्टूबर के बीच भारत-चीन यात्रा करने वालों की संख्या 10 लाख थी।
भारत-चीन संबंधों में सुधार
हाल के वर्षों में, खासकर 2025 की शुरुआत से, भारत और चीन ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य करने के लिए कई कदम उठाए हैं। अमेरिकी टैरिफ वॉर और अन्य अंतरराष्ट्रीय घटनाओं ने भी दोनों देशों को करीब आने में मदद की है।
तीन बड़े फायदे
डायरेक्ट फ्लाइट्स शुरू होने से यात्रियों को समय और खर्च की बचत होगी। इससे व्यापार और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, यह पहल दोनों देशों के बीच आपसी समझ को मजबूत करने में सहायक होगी।
यह कदम भारत और चीन के बीच संबंधों को सामान्य करने और आपसी सहयोग को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।