भोपाल जेल: हत्या के दोषी कैदी ने गौशाला में फांसी लगाकर की आत्महत्या

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भोपाल जेल: हत्या के दोषी कैदी ने गौशाला में फांसी लगाकर की आत्महत्या

भोपाल सेंट्रल जेल में बंदी ने किया सुसाइड: पेड़ से लटका मिला शव; हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहा था

भोपाल सेंट्रल जेल में रविवार की शाम को हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे बंदी ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। उसने जेल में बनी गौशाला में रस्सी का फंदा बनाकर पेड़ के सहारे फांसी लगाई है। गांधीनगर पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है।

कैदी 2017 से जेल में बंद था

पुलिस के मुताबिक, गुड्डू आदिवासी (58), बाड़ी जिला रायसेन का रहने वाला है, वह साल 2017 से हत्या के मामले में सेंट्रल जेल में बंद था। वह जेल परिसर की गौशाला में गौसेवक के रूप में कार्य करता था। रविवार को भी वह अन्य बंदियों के साथ रोजाना की तरह गौशाला में काम करने गया था।

हर रोज करीब 18 बंदी प्रहरी के साथ गौशाला में गायों की देखभाल के लिए जाते हैं। घटना वाले दिन गुड्डू ने सामान्य तरीके से काम किया, नए कपड़े पहने और ट्रैक्टर भी चलाया। शाम करीब 5.30 बजे लौटते समय गौशाला का पानी का पंप खुला रह गया था, जिस पर प्रहरी ने उसे पंप बंद करने के लिए वापस भेजा।

जेल प्रहरी ने सबसे पहले देखा फंदे पर लटका हुआ शव

काफी देर तक वापस नहीं लौटने पर प्रहरी ने अंदर जाकर देखा, जहां गुड्डू पेड़ से रस्सी के सहारे फंदे पर लटका मिला। उसने गायों के पैरों में बांधने वाली रस्सी से फांसी का फंदा बनाया था। जेल प्रशासन के अनुसार, मृतक से उसके परिवार के लोग मिलने नहीं आते थे और वह कभी पैरोल पर भी नहीं गया था।

पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है

प्रारंभिक तौर पर पारिवारिक दूरी और मानसिक तनाव के चलते आत्महत्या की आशंका जताई जा रही है। सूत्रों की माने तो जेल अधिकारी से उसका विवाद चल रहा था। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।

जबलपुर की केंद्रीय जेल बंदी ने फांसी लगाई, मौत

जबलपुर के नेताजी सुभाषचंद्र केंद्रीय जेल में सोमवार सुबह करीब साढ़े 8 बजे एक बंदी ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना की सूचना मिलते ही जेल अधीक्षक, जेलर और डॉक्टरों की टीम मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक बंदी की मौत हो चुकी थी।

जेलर मदन कमलेश के अनुसार, बंदी ने जेल अस्पताल की छत पर गमछे की मदद से फांसी लगाई। उसे तत्काल नीचे उतारकर इलाज शुरू किया गया, लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका।

Ravi Yadav