भोपाल के दुकानदारों को बड़ी राहत, सोमवार से दुकानें खुलने के संकेत
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में रविवार देर शाम मुख्यमंत्री निवास पर हुई उच्चस्तरीय बैठक में फिलहाल व्यापारियों को राहत देने का फैसला किया गया। बंद कराई गई दुकानों के सोमवार से दोबारा खुलने की संभावना है।
उच्च स्तरीय समिति का गठन
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि पूरे मामले की समीक्षा के लिए राज्य शासन के वरिष्ठ अधिकारियों की उच्च स्तरीय समिति गठित की जाए। समिति सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का अध्ययन कर पूरे प्रकरण की जांच करेगी और अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपेगी। समिति की रिपोर्ट आने तक व्यापारियों को घबराने की आवश्यकता नहीं है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने देश की 28 राजधानियों में रिहायशी क्षेत्रों में संचालित व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। बैठक में मंत्री विश्वास सारंग, कृष्णा गौर, विधायक रामेश्वर शर्मा और भगवानदास सबनानी सहित अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।
नगर निगम की कार्रवाई
शनिवार को नगर निगम ने 19 प्रतिष्ठानों को सील किया था। 65 प्रतिष्ठान कार्रवाई से पहले ही बंद हो गए थे। कार्रवाई के बाद शाम को कई दुकानें वापस खुल गईं। बैठक के बाद संकेत मिले हैं कि जिन दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को हाल ही में बंद कराया गया था, उन्हें सोमवार से दोबारा खोलने की अनुमति दी जा सकती है।
रहवासियों का विरोध
अरेरा कॉलोनी, रोहित नगर, बावड़ियाकलां समेत कई इलाकों में रहवासियों ने रैली निकाली। गौतम नगर इलाके में संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति के तत्वाधान में पैदल मार्च निकाला गया। रहवासियों ने नगर निगम की कार्रवाई पर सवाल उठाए और चेतावनी दी कि जो पार्टी या नेता उनके खिलाफ है, उनका अगले चुनाव में विरोध करेंगे।
पैदल मार्च में भोपाल के पूर्व कमिश्नर कवींद्र कियावत भी शामिल हुए। शाहपुरा समिति की अध्यक्ष शुभ्रा गोयल ने बताया कि नगर निगम ने शाहपुरा के अवैध निर्माणों पर आंखें मूंद रखी है। मार्च में रचना नगर, शांति निकेतन, शाहपुरा, गुलमोहर, अरेरा कॉलोनी के लोग शामिल हुए।
शिकायतकर्ताओं के आरोप
प्रयास संस्था की अध्यक्ष अपर्णा वाशिष्ठ ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद जिन अवैध दुकानों को सील करने का नोटिस जारी किया गया था, उनके विरुद्ध अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई। अनेक दुकानों के बाहर एक समान प्रारूप के पोस्टर चस्पा कर दिए गए।
रहवासी कमल राठी ने कहा कि पोस्टर लगाए जाने से संकेत मिलता है कि संबंधित भवनों में भू-उपयोग के विपरीत व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही थीं। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि नगर निगम की कार्रवाई केवल औपचारिकता तक सीमित रही। कुछ व्यापारियों ने अस्थायी रूप से प्रतिष्ठान बंद रखे, पोस्टर लगाकर उनकी तस्वीरें निगम को भेज दीं और अधिकांश संस्थान पुनः खुल गए।
याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी एवं लवनीश भाती द्वारा 4 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई में ये तथ्य प्रस्तुत किए जाएंगे। शिकायतकर्ता त्रिपाठी ने बताया कि नगर निगम की लाचार कार्रवाई से प्रभावशाली संचालकों के अवैध व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को बचाने का असफल प्रयास है। इससे आम नागरिकों एवं रहवासियों का जिला प्रशासन पर विश्वास डगमगा चुका है।
Sachin Saxena