भोपाल के मछली परिवार पर प्रशासन की कार्रवाई
भोपाल के विवादित मछली परिवार के कब्जे से 100 करोड़ रुपए की जमीन प्रशासन ने मुक्त करा ली है। हालांकि, हथाईखेड़ा डैम पर इस परिवार का कब्जा अब भी बरकरार है, जो प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है।
फर्जी समिति और विवादित ठेके का खुलासा
हथाईखेड़ा डैम पर मछली पकड़ने का ठेका इस्लामनगर की मछली पालन सहकारी समिति को दिया गया था, जिसे 2019 में तत्कालीन कलेक्टर ने फर्जी घोषित कर दिया था। इसके बावजूद यह समिति 2023 तक डैम से मछली पकड़ने का कार्य करती रही। चौंकाने वाली बात यह है कि 2023 में इसी ब्लैकलिस्टेड समिति को दोबारा ठेका दे दिया गया।
40 साल से चल रहा था गड़बड़ी का खेल
भास्कर की पड़ताल में सामने आया कि समिति के नाम पर ठेका लेकर पूरा संचालन मछली परिवार और उनके करीबी नीलू मियां द्वारा किया जाता था। मछुआरे बंगाल और चेन्नई से बुलाए जाते थे, और मछली परिवार ही बाजार में सौदा करता था। इससे हर साल लगभग 4 करोड़ रुपए का मुनाफा होता था।
फर्जी उपस्थिति और वित्तीय अनियमितताएं
आरटीआई में प्राप्त जानकारी से पता चला कि समिति की बैठकों में मृत सदस्यों को भी उपस्थित दिखाया गया। उदाहरण के लिए, उपाध्यक्ष मलथूराम की मृत्यु 14 अगस्त 2019 को हुई थी, लेकिन 15 अगस्त की बैठक में उनकी उपस्थिति दर्ज की गई। यहां तक कि मृत अध्यक्ष के नाम से बैंक से पैसे निकाले जाते रहे।
यह मामला 40 वर्षों से चल रही अनियमितताओं और प्रशासनिक चूक को उजागर करता है। अब प्रशासनिक कार्रवाई से उम्मीद है कि आगे ऐसी गड़बड़ियां रोकी जा सकेंगी।