भोपाल में डीएसपी के साले की मौत पर पुलिसकर्मी गिरफ्तार, हत्या का मामला दर्ज

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भोपाल में डीएसपी के साले  की मौत पर पुलिसकर्मी गिरफ्तार, हत्या का मामला दर्ज

भोपाल में डीएसपी के साले की मौत: पुलिसकर्मियों पर हत्या का मामला

भोपाल में डीएसपी के साले और सॉफ्टवेयर इंजीनियर उदित गायकी की पुलिसकर्मियों द्वारा पिटाई के बाद मौत का मामला सामने आया है। इस घटना ने पूरे मध्य प्रदेश में आक्रोश फैला दिया है। पुलिस ने उदित की मौत के आरोप में दोषी पुलिसकर्मियों संतोष बामनिया और सौरभ आर्य को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

घटना का विवरण

घटना गुरुवार रात की है, जब पिपलानी थाने में तैनात कॉन्स्टेबल संतोष बामनिया और सौरभ आर्य ने उदित और उसके दोस्तों को संदिग्ध मानकर रोका। आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने उदित की डंडे से पिटाई की, जिसकी वजह से वह बेहोश हो गया। उसके दोस्तों ने उसे एम्स अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का खुलासा

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में उदित की मौत का कारण ट्रॉमेटिक हैमरेजिक पेन्क्रियाटाइटिस बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, शरीर पर 16 जगहों पर गंभीर चोटों के निशान पाए गए। पेनक्रियाज में चोट और नसों के फटने से शरीर में ब्लीडिंग हुई, जिससे उसकी मौत हो गई।

सीसीटीवी फुटेज और एफआईआर

सीसीटीवी फुटेज में देखा गया कि एक पुलिसकर्मी उदित के हाथ पकड़े हुए था और दूसरा डंडे से पिटाई कर रहा था। हालांकि, एफआईआर में पिटाई का जिक्र गायब है। इसमें केवल यह उल्लेख किया गया है कि उदित संदिग्ध गतिविधियों में शामिल था। यह भी आरोप लगाया गया है कि पुलिस ने उदित के दोस्तों पर दबाव डालकर बयान दर्ज कराए।

परिवार का आक्रोश

उदित के परिवार ने पुलिस पर हत्या का आरोप लगाया और न्याय की मांग की है। उदित के पिता ने बताया कि उनका बेटा बेंगलुरु में नौकरी की तलाश कर रहा था और भोपाल अपने दस्तावेज लेने आया था। वह माता-पिता का इकलौता बेटा था, जिसकी मौत ने परिवार को सदमे में डाल दिया है।

पुलिसकर्मियों का पक्ष

गिरफ्तार पुलिसकर्मियों ने बयान दिया कि उदित संदिग्ध गतिविधियों में शामिल था और भागने की कोशिश कर रहा था। उन्होंने स्वीकार किया कि पिटाई की गई, लेकिन इतनी नहीं कि उसकी मौत हो।

राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया

घटना के बाद पिपलानी थाने पर प्रदर्शन हुआ, जिसमें कांग्रेस नेता सुखदेव पांसे भी शामिल हुए। उन्होंने दोषी पुलिसकर्मियों को नौकरी से बर्खास्त करने और पीड़ित परिवार को मुआवजा देने की मांग की।

निष्कर्ष

यह घटना पुलिस की बर्बरता और कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है। मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग जोर पकड़ रही है।

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