भोपाल SIR में 2.28 लाख वोटर्स नो मेपिंग में, नाम कटने का खतरा

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भोपाल SIR में 2.28 लाख वोटर्स नो मेपिंग में, नाम कटने का खतरा

भोपाल में SIR डिजिटाइजेशन पूरा, लाखों वोटर्स का डेटा गायब

भोपाल में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत मतदाता सूची के डिजिटाइजेशन का काम पूरा कर लिया गया है। कुल 21 लाख 25 हजार 908 मतदाताओं के फॉर्म डिजिटाइज किए गए, लेकिन इनमें से लगभग 2 लाख 28 हजार 387 मतदाताओं का 2003 की मतदाता सूची के आधार पर डेटा नहीं मिल पाया, जिन्हें ‘नो मेपिंग’ श्रेणी में रखा गया है।

10.7 प्रतिशत मतदाता ‘नो मेपिंग’ दायरे में

कुल मतदाताओं में से लगभग 10.7 प्रतिशत ऐसे हैं जिनका पुराना रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। जिला प्रशासन अब अगले लगभग एक महीने तक इन मतदाताओं का रिकॉर्ड खोजने का काम करेगा। यदि तय प्रक्रिया के बाद भी संबंधित वोटर का डेटा नहीं मिलता और वे आवश्यक दस्तावेज जमा नहीं कराते, तो उनके नाम मतदाता सूची से हटाए जा सकते हैं।

नरेला में सबसे ज्यादा, बैरसिया में सबसे कम नो मेपिंग

‘नो मेपिंग’ की सबसे ज्यादा संख्या नरेला विधानसभा क्षेत्र में दर्ज की गई है, जहां 55 हजार 384 यानी 15.61 प्रतिशत मतदाता इस श्रेणी में आए हैं। सबसे कम संख्या बैरसिया में दर्ज हुई, जहां सिर्फ 3 हजार 419 मतदाता ‘नो मेपिंग’ में हैं, जो 1.35 प्रतिशत है। भोपाल उत्तर में 26 हजार 965, भोपाल दक्षिण-पश्चिम में 32 हजार 818, भोपाल मध्य में 27 हजार 890, गोविंदपुरा में 47 हजार 264 और हुजूर में 34 हजार 647 मतदाता ‘नो मेपिंग’ श्रेणी में शामिल हैं।

SIR कार्य की समयसीमा और प्रगति

SIR का काम 4 नवंबर से शुरू हुआ था और इसे 9 दिसंबर तक चलना है। सबसे पहले बैरसिया विधानसभा ने अपना लक्ष्य पूरा किया। इसके बाद हुजूर, भोपाल उत्तर और भोपाल मध्य में काम पूरा हुआ। रविवार को शेष विधानसभाओं ने भी 100 प्रतिशत डिजिटाइजेशन पूरा कर लिया।

भोपाल की सातों विधानसभा सीटों पर कुल 21 लाख 25 हजार 908 मतदाता हैं। 19 नवंबर तक फॉर्म वापस मिलने का प्रतिशत केवल 7.37 था, जो 7 दिसंबर की शाम तक बढ़कर 100 प्रतिशत तक पहुंच गया।

लापरवाही पर कार्रवाई, समय पर काम करने वालों को सम्मान

SIR के काम में लापरवाही बरतने पर एक दर्जन से अधिक बूथ लेवल ऑफिसरों (BLO) पर कार्रवाई की गई है। साथ ही, समय पर काम पूरा करने वाले BLO को सम्मानित भी किया जा रहा है। कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने रविवार को कई BLO को सम्मानित किया। इससे पहले, काम समय से पूरा करने पर बैरसिया के BLO को बड़े तालाब में शिकारा नाव की सैर करवाई गई थी।

नो मेपिंग वाले मतदाताओं के लिए 50 दिन की मोहलत

जिन मतदाताओं के फॉर्म ‘नो मेपिंग’ श्रेणी में आए हैं, उन्हें दस्तावेज जमा करने के लिए 50 दिन का समय दिया जाएगा। इस दौरान वे अपने आवश्यक प्रमाण पत्र प्रस्तुत कर सकते हैं। अधिकारियों का कहना है कि वास्तविक मतदाताओं को घबराने की जरूरत नहीं है, प्रशासन भी उन्हें दस्तावेज जमा कराने में मदद करेगा।

उप जिला निर्वाचन अधिकारी भुवन गुप्ता ने बताया कि ‘नो मेपिंग’ में आने का अर्थ यह है कि संबंधित मतदाता का पुराना रिकॉर्ड या मैपिंग उपलब्ध नहीं है, जिसे अब दस्तावेजों के आधार पर सत्यापित किया जाएगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि जिनका नाम वर्तमान मतदाता सूची में नहीं है या जो बाहर से आकर यहां बसे हैं और वहां से उनके नाम कट चुके हैं, वे भी निर्धारित प्रक्रिया और फॉर्म के माध्यम से अपने नाम दर्ज कराने की कोशिश कर सकते हैं।

पहले भी हुई प्रगति और लापरवाही के मामले

इससे पहले SIR के दौरान भोपाल में 20 लाख 71 हजार से अधिक मतदाताओं के फॉर्म डिजिटाइज हो चुके थे, जो लगभग 97.5 प्रतिशत था। तब सात में से चार विधानसभा क्षेत्र—बैरसिया, हुजूर, भोपाल उत्तर और भोपाल मध्य—ने अपना काम पूरा कर लिया था और शेष तीन विधानसभा क्षेत्रों में 24 घंटे के भीतर लक्ष्य पूरा करने का दावा किया गया था।

SIR सर्वे के दौरान कुछ BLO की गंभीर लापरवाही भी सामने आई थी। एक मामले में BLO ने मैपिंग कार्य और फॉर्म तो ले लिए, लेकिन फील्ड में काम ही नहीं किया, जिसके चलते उनके बूथ क्षेत्र में SIR का काम नहीं हो पाया। ऐसे दो BLO को निलंबित करने का प्रस्ताव कलेक्टर के पास भेजा गया था।

निष्कर्ष: डेटा शुद्धिकरण और मतदाता अधिकार दोनों पर जोर

भोपाल में SIR डिजिटाइजेशन पूरा होने के साथ प्रशासन एक तरफ मतदाता सूची के शुद्धिकरण पर जोर दे रहा है तो दूसरी ओर वास्तविक मतदाताओं को दस्तावेज देने के लिए पर्याप्त समय और सहायता देने की बात भी कर रहा है। आने वाले 50 दिन ‘नो मेपिंग’ श्रेणी में आए लाखों मतदाताओं के लिए महत्वपूर्ण होंगे, क्योंकि इसी अवधि में उनके दस्तावेज और पुराने रिकॉर्ड के आधार पर यह तय होगा कि उनके नाम मतदाता सूची में बने रहेंगे या नहीं।

L. N. Bhargava