छतरपुर अस्पताल में चूहों का आतंक, मरीजों की बढ़ी चिंता

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छतरपुर अस्पताल में चूहों का आतंक, मरीजों की बढ़ी चिंता

छतरपुर जिला अस्पताल में चूहों का आतंक, मरीजों की बढ़ी चिंता

छतरपुर जिला अस्पताल में चूहों की समस्या गंभीर रूप ले चुकी है। प्रसूति वार्ड में माताओं को अपने नवजात शिशुओं की सुरक्षा के लिए रात-दिन जागकर पहरा देना पड़ रहा है। इंदौर में चूहों द्वारा दो नवजातों की मौत की घटना के बाद यहां चिंता और बढ़ गई है।

चूहों पर नियंत्रण के प्रयास विफल

अस्पताल प्रशासन ने जनवरी 2022 में सतना की एक कंपनी को चूहों के नियंत्रण के लिए डेढ़ लाख रुपए का ठेका दिया था। हालांकि, इस प्रयास का कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकला। चूहों की संख्या कम होने के बजाय लगातार बढ़ रही है, जिससे मरीजों और उनके परिजनों में डर का माहौल है।

अस्पताल के कई विभाग प्रभावित

चूहों का प्रकोप केवल प्रसूति वार्ड तक सीमित नहीं है। बर्न वार्ड, मेडिकल वार्ड, ट्रॉमा वार्ड और बच्चा वार्ड में भी इनकी संख्या तेजी से बढ़ रही है। ये चूहे मरीजों के खाने-पीने का सामान, दवाइयां और कपड़े कुतर रहे हैं। यहां तक कि मरीजों को काटने की घटनाएं भी सामने आई हैं।

संक्रमण फैलने का खतरा

चूहों से न केवल मरीजों को शारीरिक नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि संक्रमण फैलने का खतरा भी लगातार बढ़ रहा है। इसके बावजूद अस्पताल प्रशासन इस समस्या के समाधान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा है। ठेका समाप्त होने के बाद से नई व्यवस्था नहीं की गई है, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई है।

इस समस्या को तुरंत हल करना आवश्यक है, क्योंकि यह मरीजों और नवजात शिशुओं की सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा बन गई है। प्रशासन को तत्काल कदम उठाने की जरूरत है ताकि अस्पताल का माहौल सुरक्षित और स्वच्छ बनाया जा सके।