छतरपुर में 9 करोड़ की सरकारी जमीन पर फर्जीवाड़ा
मध्य प्रदेश के छतरपुर में लोक निर्माण विभाग (PWD) की बहुमूल्य जमीन को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर निजी नामों पर रजिस्ट्री कराने का मामला सामने आया है। इस मामले में लापरवाही बरतने वाले तीन अधिकारियों और कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है।
फर्जी दस्तावेजों से हुआ जमीन का रजिस्ट्रेशन
छतरपुर कोतवाली थाने के पास स्थित 4000 वर्ग फीट जमीन, जिसकी अनुमानित कीमत 9 करोड़ रुपये है, को धीरेंद्र गौर और दुर्गेश पटेल के नाम जून 2024 में मात्र 84.54 लाख रुपये में रजिस्ट्री किया गया। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि यह रजिस्ट्री फर्जी दस्तावेजों और गलत कोर्ट डिक्री के आधार पर की गई।
लापरवाह अफसर सस्पेंड
इस मामले में लोक निर्माण विभाग के चीफ इंजीनियर ने छतरपुर में पदस्थ प्रभारी एसडीओ कमलेश मिश्रा, सहायक ग्रेड कर्मचारी विजय कुमार खरे और राजाराम कुशवाहा को लापरवाही का दोषी पाया और उन्हें सस्पेंड कर दिया। कमलेश मिश्रा और विजय कुमार खरे को क्रमशः पन्ना और नौगांव कार्यालय भेजा गया है, जहां वे जीवन निर्वाह भत्ता प्राप्त करेंगे।
जांच और कार्रवाई का दौर
जिला प्रशासन ने नगर पालिका को नोटिस जारी कर इस मामले में नियमों के उल्लंघन और रजिस्टर में ओवरराइटिंग की जांच के आदेश दिए हैं। साथ ही, जमीन के रजिस्ट्रेशन पर रोक लगाई गई है। विभाग ने हाईकोर्ट में अपील की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
पुरानी केस हिस्ट्री
यह विवाद 1974 से चला आ रहा है, जब इस जमीन को सरकारी सम्पत्ति घोषित किया गया था। 2004 में लेबर कोर्ट ने PWD के पक्ष में फैसला सुनाया, लेकिन 2005 में इस पर हाईकोर्ट में अपील दाखिल कर दी गई। कथित तौर पर अधिकारियों की लापरवाही के कारण, नवंबर 2024 में फर्जी डिक्री जारी हुई और इसके बाद जून 2025 में रजिस्ट्री हुई।
रजिस्ट्रेशन पर विवाद
जमीन के खरीदार धीरेंद्र गौर का कहना है कि उन्होंने कोर्ट की डिक्री के आधार पर रजिस्ट्री कराई है, जबकि प्रशासन का मानना है कि यह पूरी तरह से गैरकानूनी है।
आरोप-प्रत्यारोप जारी
इस मामले में संविदा कर्मचारी उमाशंकर पाल ने वीडियो जारी कर उच्च अधिकारियों पर मिलीभगत का आरोप लगाया है। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए सीसीटीवी और नार्को टेस्ट की मांग की है।
भविष्य की कार्रवाई
कलेक्टर पार्थ जैसवाल ने इस मामले की जांच के लिए चार सदस्यीय समिति का गठन किया है। साथ ही, सभी शासकीय भवनों की जांच की जाएगी और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
यह मामला न केवल प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है, बल्कि सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा के महत्व को भी रेखांकित करता है।