छठ महापर्व का समापन: उगते सूर्य को ऊषा अर्घ्य
छठ पूजा का चौथा और अंतिम दिन मंगलवार को मनाया गया। इस दिन भक्तों ने उगते सूर्य को 'ऊषा अर्घ्य' देकर 36 घंटे का निर्जला उपवास समाप्त किया। यह महापर्व 25 अक्टूबर को नहाय खाय से शुरू हुआ था। उगते सूर्य को अर्घ्य देने का मुहूर्त सुबह 6:27 बजे तक रहा।
देशभर में उत्सव की धूम
भारत के विभिन्न राज्यों जैसे बिहार, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, मध्य प्रदेश, और दिल्ली में छठ पूजा की धूम रही। दिल्ली में लगभग 1300 घाटों पर सामूहिक पूजा का आयोजन हुआ, जिसमें 17 प्रमुख घाट यमुना नदी के किनारे बनाए गए थे। मुंबई और ठाणे में भी 83 स्थानों पर सामूहिक पूजा हुई।
विदेशों में भी छठ का जश्न
भारत के अलावा ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, फिजी, सूरीनाम, मॉरीशस, और त्रिनिनाद-टोबेगो में भी भारतीय समुदाय ने छठ पूजा का आयोजन किया। वहां व्रतियों ने सामूहिक रूप से सूर्य को अर्घ्य दिया।
छठ महापर्व का महत्व
ऋग्वेद और स्कंद पुराण के अनुसार, सूर्य और उसकी किरणों की पूजा से शरीर और मन शुद्ध होते हैं। छठ पूजा का धार्मिक महत्व राजा प्रियव्रत की कथा से जुड़ा है, जिसमें षष्ठी देवी की पूजा से संतान प्राप्ति की मान्यता है।
मोदी सरकार ने छठ पूजा को यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर सूची में शामिल कराने की पहल की है।
छठ महापर्व की समापन पर पूरे देश और दुनिया में श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से इस त्योहार को मनाया।
Gulzar Ahmad