चुनाव आयोग ने SIR को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दी सफाई
चुनाव आयोग (EC) ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल करते हुए स्पष्ट किया कि पूरे देश में समय-समय पर विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) कराना उसका विशेषाधिकार है। आयोग ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 324 के अंतर्गत वोटर लिस्ट बनाना और उसमें बदलाव करना केवल चुनाव आयोग का अधिकार है। किसी अन्य संस्था या अदालत को इसमें हस्तक्षेप की अनुमति नहीं दी जा सकती।
कोर्ट के निर्देश पर EC की प्रतिक्रिया
यह हलफनामा सुप्रीम कोर्ट में दाखिल उस याचिका के जवाब में दिया गया, जिसमें मांग की गई थी कि चुनाव आयोग को चुनावों से पहले SIR कराने का निर्देश दिया जाए। आयोग ने कहा कि वह अपनी जिम्मेदारी समझता है और मतदाता सूची को पारदर्शी बनाए रखने के लिए लगातार काम कर रहा है।
बिहार में SIR प्रक्रिया पर विवाद
बिहार में 2003 के बाद पहली बार SIR प्रक्रिया की जा रही है। आयोग का उद्देश्य मृत व्यक्तियों, डुप्लीकेट वोटर कार्ड धारकों और अवैध प्रवासियों के नाम सूची से हटाना है। हालांकि, विपक्षी दलों ने इस प्रक्रिया को पक्षपाती और साजिशपूर्ण करार दिया है। EC ने जुलाई 2025 में सभी राज्यों को SIR की तैयारी का निर्देश दिया, जिसमें बिहार को शामिल नहीं किया गया था।
आधार का उपयोग और सुप्रीम कोर्ट का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में SIR प्रक्रिया के दौरान आधार कार्ड को पहचान का प्रमाण मानने का निर्देश दिया। हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि आधार कार्ड नागरिकता का प्रमाण नहीं है। EC को निर्देश दिया गया कि वह वोटर सूची में नाम जोड़ते समय आधार की प्रामाणिकता की जांच करे।
निष्कर्ष
चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को आश्वासन दिया है कि वह मतदाता सूची को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। हालांकि, बिहार में SIR प्रक्रिया को लेकर उठे राजनीतिक विवादों ने इस प्रक्रिया की चुनौतियों को उजागर किया है। आयोग ने देशभर में SIR की योजना बनाई है, जिससे उसकी प्रक्रियाओं में और सुधार की उम्मीद है।