पूर्व सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ का बयान: पीएम मोदी को पूजा में बुलाना शिष्टाचार
इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में खुलकर रखे विचार
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने गुरुवार को मुंबई में आयोजित इंडिया टुडे कॉन्क्लेव के मंच पर कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर खुलकर अपनी राय व्यक्त की। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पूजा में बुलाने से लेकर सोशल मीडिया पर उठे सवालों तक, संविधान की धर्मनिरपेक्षता और न्यायपालिका के कार्यों पर विस्तार से चर्चा की।
पीएम मोदी को पूजा में बुलाने पर दी सफाई
पूर्व सीजेआई चंद्रचूड़ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने घर पूजा में बुलाने पर हुई आलोचनाओं को लेकर कहा कि सीजेआई विपक्ष का नेता नहीं होता, बल्कि वह सिस्टम का अंग होता है। उन्होंने यह भी बताया कि यह एक शिष्टाचार है और इसे किसी राजनीतिक चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा, "मुझे कोई संकोच नहीं है कि मैं हिंदू हूं। संविधान किसी धर्म के विरोध की बात नहीं करता।" उन्होंने यह भी जोड़ा कि न्यायाधीश किसी भी धर्म का हो, लेकिन कोर्ट में वह केवल न्याय करता है।
व्यक्तिगत अनुभव साझा किए
चंद्रचूड़ ने अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए बताया कि 2014 में उनकी मां का निधन हुआ था। उस समय वह उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद में थे। उन्होंने कहा कि उस समय जो उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे, उन्होंने उनके घर आकर शोक व्यक्त किया था। इसे भी उन्होंने एक कर्टशी और शिष्टाचार का हिस्सा बताया। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनका धर्म उन्हें किसी भी धर्म की प्रार्थना करने की इजाजत देता है।
जजों की नियुक्ति और नेपोटिज्म पर विचार
कॉलेजियम और नेपोटिज्म पर उठे सवालों के जवाब में चंद्रचूड़ ने कहा कि लेबल पर ध्यान देने के बजाय काम की गुणवत्ता पर ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने अपने करियर का उदाहरण देते हुए बताया कि वह 45 साल की उम्र में हाईकोर्ट के जज बने थे और 16 साल तक वहां काम किया। इसके बाद उन्होंने चार साल तक सुप्रीम कोर्ट में केस देखे। उन्होंने यह भी कहा कि उम्र का टैलेंट से कोई संबंध नहीं होता और हाईकोर्ट में जज की नियुक्ति के लिए 45 साल की उम्र का प्रावधान है।
न्यायपालिका में महिलाओं और युवाओं की भागीदारी
उन्होंने न्यायपालिका में महिलाओं और युवाओं की बढ़ती भागीदारी पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि जिला स्तर पर गुणवत्ता नियुक्तियां हो रही हैं और नई पीढ़ी न्यायपालिका में प्रवेश कर रही है, जो भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत है।
निष्कर्ष
पूर्व सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने अपने विचारों से यह स्पष्ट किया कि न्यायपालिका एक धर्मनिरपेक्ष संस्था है, जहां धर्म और राजनीति के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। उनके विचारों ने न्यायपालिका में पारदर्शिता और कार्य की गुणवत्ता पर जोर दिया। उनका संदेश न्यायपालिका में बढ़ती विविधता और सुधार की दिशा में एक अहम कदम के रूप में देखा जा सकता है।