देवास में अतिक्रमण हटाने के दौरान दंपती ने खुद को आग लगाई
मध्यप्रदेश के देवास जिले के खातेगांव स्थित सतवास कस्बे में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान एक दंपती ने खुद पर पेट्रोल डालकर आग लगा ली। घटना के बाद क्षेत्र में तनाव फैल गया और लोगों ने पुलिस थाने के सामने चक्काजाम कर विरोध प्रदर्शन किया।
अतिक्रमण कार्रवाई के बीच दर्दनाक घटना
सूचना के अनुसार, सतवास बस स्टैंड पर स्टेशनरी और फोटोकॉपी की दुकान चलाने वाले संतोष व्यास एक कॉलोनी में अपना मकान निर्माण करा रहे थे। निर्माण को नाली पर अतिक्रमण की शिकायत के आधार पर प्रशासन ने चिन्हित किया था। बुधवार को तहसीलदार अरविंद दिवाकर जेसीबी मशीन और अमले के साथ अतिक्रमण हटाने के लिए मौके पर पहुंचे।
कार्रवाई के दौरान संतोष व्यास और उनकी पत्नी जयश्री व्यास की तहसीलदार से बहस हो गई। विवाद बढ़ने पर दंपती ने अचानक अपने ऊपर पेट्रोल डालकर तहसीलदार और टीम के सामने ही खुद को आग के हवाले कर दिया। वहां मौजूद लोगों और प्रशासनिक अमले ने तत्काल आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन तब तक दोनों गंभीर रूप से झुलस चुके थे।
गंभीर हालत में इंदौर रेफर, क्षेत्र में आक्रोश
दंपती को पहले सतवास में प्राथमिक उपचार दिया गया, जहां उनकी गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें इंदौर रेफर कर दिया गया। घटना के बाद क्षेत्र में भारी आक्रोश फैल गया। स्थानीय लोग सतवास बस स्टैंड पर स्थित पुलिस थाने के सामने जमा हो गए और सड़क जाम कर नारेबाजी करने लगे।
प्रदर्शनकारियों ने तीन किलोमीटर तक लंबा जाम लगा दिया, जिससे वाहनों की कतारें लग गईं। लोग प्रशासन और तहसीलदार के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे थे। पुलिस अधिकारियों को थाने के बाहर घेरकर लोगों ने विरोध जताया।
घूसखोरी और अवैध कार्रवाई के आरोप
मौके पर मौजूद लोगों और दंपती के परिजनों ने आरोप लगाया कि अतिक्रमण हटाने पहुंची टीम ने कथित रूप से पैसे की मांग की और परिवार पर दबाव बनाया। परिजनों का कहना है कि जिस भवन का निर्माण किया जा रहा था, उसके लिए पहले ही सभी आवश्यक अनुमतियां ली जा चुकी थीं, इसलिए यह कार्रवाई अवैध और मनमानी थी।
वहीं, व्यास परिवार ने स्पष्ट रूप से प्रशासनिक कार्रवाई को अवैधानिक बताया और कहा कि वैध निर्माण को भी अतिक्रमण बताकर तोड़ने की कोशिश की जा रही थी, जिससे मजबूरी और आक्रोश में यह कदम उठाया गया।
प्रशासन की सफाई और अधिकारियों पर कार्रवाई
सतवास तहसीलदार अरविंद दिवाकर ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि वे एसडीएम के आदेश पर नाली पर से अतिक्रमण हटाने गए थे। उनके अनुसार, कार्रवाई के दौरान एक अन्य परिवार ने अपना अतिक्रमण स्वयं ही हटा लिया था, लेकिन व्यास परिवार के यहां विरोध हुआ और उसी दौरान दंपती ने अचानक पेट्रोल डालकर खुद को आग लगा ली।
तहसीलदार का कहना है कि प्रशासनिक अमले और स्थानीय लोगों ने मिलकर आग बुझाई और तुरंत दंपती को अस्पताल पहुंचाया। प्रशासन का दावा है कि पूरी कार्रवाई नियमानुसार और उच्च अधिकारियों के निर्देश पर की जा रही थी।
घटना के बाद बढ़ते तनाव और आरोपों के बीच कलेक्टर ने तहसीलदार अरविंद दिवाकर को उनके पद से हटाकर कलेक्टर कार्यालय में अटैच कर दिया है। इससे संकेत मिलते हैं कि पूरे प्रकरण की जांच की जा रही है और प्रशासनिक स्तर पर जिम्मेदारियों की समीक्षा होगी।
निष्कर्ष: जांच और जवाबदेही की मांग
देवास के सतवास में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान दंपती द्वारा आत्मदाह जैसा कदम उठाए जाने ने प्रशासनिक तरीकों, पारदर्शिता और संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर प्रशासन अतिक्रमण हटाने को नियम आधारित कार्रवाई बता रहा है, वहीं दूसरी ओर परिवार और स्थानीय लोग इसे अवैध, दबावपूर्ण और भ्रष्टाचार से प्रेरित बता रहे हैं।
दंपती की गंभीर स्थिति, क्षेत्र में फैला आक्रोश और अधिकारियों पर हुई प्रारंभिक कार्रवाई यह संकेत देती है कि मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारों की जवाबदेही तय करना आवश्यक है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके और प्रशासन पर लोगों का भरोसा बना रहे।
Vivek Singh