दतिया उपचुनाव: भाजपा की हार और कांग्रेस की जीत, ये रहीं पांच बड़ी वजहें

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दतिया उपचुनाव: भाजपा की हार और कांग्रेस की जीत, ये रहीं पांच बड़ी वजहें

दतिया उपचुनाव में भाजपा की हार और कांग्रेस की जीत

दतिया विधानसभा उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी कांग्रेस के घनश्याम सिंह से 6,016 मतों से हार गए। इस जीत से विधानसभा में कांग्रेस की 65 सीटें कायम रहेंगी।

भाजपा की हार के प्रमुख कारण

टिकट बदलाव

सीट खाली होने के बाद डॉ. नरोत्तम मिश्रा उम्मीदवारी की तैयारी में थे, लेकिन अंतिम समय में भाजपा ने आशुतोष तिवारी को टिकट दिया। विरोध में नरोत्तम समर्थकों ने करीब 18 घंटे हाईवे जाम रखा। समझाने पर आंदोलन खत्म हुआ, लेकिन कार्यकर्ताओं की नाराजगी मतदान तक बनी रही।

जातीय समीकरण

दतिया में करीब 40 हजार कुशवाह और 20 हजार यादव मतदाता हैं। भाजपा ने दोनों समुदायों तक पहुंच के प्रयास किए, लेकिन टिकट बदलाव के बाद इन वर्गों का एक हिस्सा पार्टी के साथ पूरी तरह नहीं जुड़ा।

नरोत्तम समर्थकों की निष्क्रियता

डॉ. नरोत्तम मिश्रा करीब 18 वर्षों तक दतिया में संगठन और सत्ता का प्रमुख चेहरा रहे। टिकट कटने के बाद बड़ी संख्या में समर्थक चुनावी अभियान में सक्रिय नहीं दिखे। दूसरे जिलों से बुलाए गए कार्यकर्ताओं को स्थानीय समझ की कमी खली।

विधायक और मंत्रियों की तैनाती

भाजपा ने 291 बूथों को 20 शक्ति केंद्रों में बांटकर प्रत्येक की जिम्मेदारी एक विधायक को दी थी। आठ मंत्रियों ने लगातार दौरे किए, लेकिन इसका अपेक्षित असर नहीं दिखा।

2023 की नाराजगी

2023 विधानसभा चुनाव के बाद मतदाताओं में बनी नाराजगी उपचुनाव तक पूरी तरह खत्म नहीं हुई। सड़क, पानी, रोजगार और व्यापार जैसे मुद्दों पर मतदाता सरकार के दावों से संतुष्ट नहीं दिखे। उपचुनाव में मतदान 2023 के मुकाबले करीब 9 प्रतिशत कम रहा।

कांग्रेस की जीत के प्रमुख कारण

परिचित चेहरे पर भरोसा

घनश्याम सिंह दतिया राजघराने से जुड़े हैं और दो बार विधायक रह चुके हैं। उनकी स्थानीय पहचान और व्यक्तिगत पहुंच का लाभ कांग्रेस को मिला।

एकजुटता

कांग्रेस इस चुनाव में अपेक्षाकृत एकजुट दिखी। प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और दिग्विजय सिंह ने संयुक्त रूप से प्रचार किया।

असंतोष संभालना

टिकट को लेकर अवधेश नायक और राजेंद्र भारती के समर्थकों में असंतोष की चर्चा रही। जीतू पटवारी कई बार राजेंद्र भारती के घर पहुंचे।

बूथ स्तर तक प्रचार

कांग्रेस ने विधानसभा क्षेत्र को चार हिस्सों में बांटकर प्रचार किया। बूथ स्तर तक संपर्क अभियान चलाया।

जातीय समीकरणों का लाभ

कांग्रेस ने ब्राह्मण, कुशवाह, यादव और एससी-एसटी मतदाताओं पर ध्यान दिया। आजाद समाज पार्टी के प्रत्याशी की मौजूदगी से एससी वोटों के बंटवारे का नुकसान अपेक्षाकृत भाजपा को हुआ।

आगे के संभावित प्रभाव

हार के बाद भाजपा में टिकट चयन, बूथ प्रबंधन और गुटबाजी पर समीक्षा की संभावना है। कांग्रेस इस जीत को बीजेपी के गढ़ में अपनी जीत के उदाहरण के रूप में पेश कर सकती है। विपक्ष इसे सत्ता विरोधी माहौल के संकेत के रूप में उठा सकता है। दतिया का परिणाम 2028 विधानसभा चुनाव की टिकट रणनीति को प्रभावित कर सकता है।

Pushpendra Chaubey