दूषित पानी से 17 मौतें, हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी; सरकार-अफसरों पर संकट

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दूषित पानी से 17 मौतें, हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी; सरकार-अफसरों पर संकट

इंदौर में दूषित पानी से मौतों पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से विस्तृत जवाब तलब

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में मंगलवार को दूषित पेयजल से जुड़ी घटनाओं को लेकर दायर पांच याचिकाओं की एक साथ सुनवाई हुई। न्यायालय ने इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी पीने से हुई मौतों और बीमारियों को गंभीर बताते हुए राज्य सरकार और नगर निगम के रवैये की कड़ी आलोचना की। कोर्ट ने कहा कि इस घटना ने देश के सबसे स्वच्छ शहर कहलाने वाले इंदौर की छवि को गंभीर नुकसान पहुंचाया है।

स्वच्छ पेयजल को मौलिक अधिकार, अफसरों पर तय हो सकती है आपराधिक जिम्मेदारी

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल इंदौर ही नहीं, बल्कि पूरे मध्य प्रदेश में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना जनता का मौलिक अधिकार है और इस अधिकार से किसी भी हालत में समझौता नहीं किया जा सकता। अदालत ने चेतावनी दी कि यदि भविष्य में आवश्यकता पड़ी तो दोषी अधिकारियों पर सिविल और क्रिमिनल लायबिलिटी तय की जाएगी। साथ ही संकेत दिए गए कि यदि पीड़ितों को दिया गया मुआवजा कम पाया गया तो अदालत इस पर भी उपयुक्त निर्देश जारी करेगी।

दूषित पानी से 17 मौतें, 110 मरीज अस्पताल में भर्ती

भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी पीने से अब तक 17 लोगों की मौत हो चुकी है। मंगलवार को उल्टी-दस्त के 38 नए मामले सामने आए, जिनमें से 6 मरीजों को अरबिंदो अस्पताल रेफर किया गया। कुल 110 मरीज विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हैं, जबकि बीमार होने के बाद कुल 421 मरीजों को अस्पताल लाया गया था, जिनमें से 311 को डिस्चार्ज किया जा चुका है। आईसीयू में 15 मरीजों का उपचार जारी है।

याचिकाकर्ताओं ने प्रशासन की लापरवाही और पुराने आदेशों की अनदेखी बताई

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि 31 दिसंबर 2025 को हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और नगर निगम को स्वच्छ पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए थे, लेकिन प्रभावित क्षेत्रों में अब भी दूषित पानी की आपूर्ति की जा रही है। याचिकाकर्ताओं के वकील ने दलील दी कि पूर्व में की गई शिकायतों पर प्रशासन ने समय पर ध्यान नहीं दिया, अन्यथा वर्तमान जैसी स्थिति उत्पन्न नहीं होती।

सीनियर काउंसिल ने यह भी बताया कि वर्ष 2022 में महापौर द्वारा नई पाइपलाइन बिछाने का प्रस्ताव पारित किया गया था, लेकिन फंड जारी न होने के कारण अब तक काम शुरू नहीं हो सका। इसके अलावा, 2017-18 में इंदौर के विभिन्न क्षेत्रों से लिए गए 60 पानी के नमूनों में से 59 पीने योग्य नहीं पाए गए थे। यह रिपोर्ट मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की थी, इसके बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

राज्य सरकार और नगर निगम से नई स्टेटस रिपोर्ट मांगी गई

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और नगर निगम को निर्देश दिया कि वे इस मामले में अपना विस्तृत जवाब दाखिल करें और एक नई स्टेटस रिपोर्ट प्रस्तुत करें। अदालत ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार में स्वच्छ पेयजल का अधिकार भी शामिल है और इसकी अनदेखी गंभीर विषय है। अगली सुनवाई 15 जनवरी को होगी, जिसमें मुख्य सचिव को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित रहने के आदेश दिए गए हैं।

कांग्रेस नेताओं का दौरा, इस्तीफे की मांग

दूषित पानी से हुई मौतों के बाद कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार की अगुआई में पार्टी कार्यकर्ता मंगलवार दोपहर भागीरथपुरा पहुंचे। क्षेत्र में पहले से ही बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात था और वहां जाने वाले सभी रास्तों को बैरिकेड लगाकर बंद कर दिया गया था।

दूषित पानी से जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों से मिलने पहुंचे कांग्रेस नेताओं की पुलिस अधिकारियों से बहस भी हुई। बाद में वे दूसरे रास्ते से प्रभावित क्षेत्र के भीतर पहुंचे और मृतक अशोक लाल पवार, जीवन लाल और गीता बाई के घर जाकर परिजनों से बातचीत की। इसके बाद वे लगभग तीन बजे भागीरथपुरा से लौट गए।

भागीरथपुरा में कांग्रेस नेताओं ने इंदौर के प्रभारी मंत्री होने के नाते मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और महापौर पुष्यमित्र भार्गव से इस्तीफा मांगा।

मामले की श्रेणीकरण और आगे की कार्यवाही

हाईकोर्ट ने दूषित पानी से हुई मौतों और उससे जुड़े मुद्दों को सात श्रेणियों में बांटा है, ताकि विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत और व्यवस्थित रूप से सुनवाई की जा सके। अदालत के निर्देशों के बाद अब राज्य सरकार और नगर निगम की नई स्टेटस रिपोर्ट और अगली सुनवाई में मुख्य सचिव की वर्चुअल उपस्थिति इस मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

Janmejay Chaturvedi