इंदौर दूषित पेयजल कांड पर हाईकोर्ट सख्त, कांग्रेस का शहरभर में प्रदर्शन तेज
भागीरथपुरा में मौतों के बाद राजनीतिक घेराबंदी और न्यायिक दखल
इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल से कई लोगों की मौत और बड़ी संख्या में बीमार होने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। घटना के विरोध में कांग्रेस ने इंदौर के सभी वार्डों में प्रदर्शन शुरू कर दिया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार भी इन प्रदर्शनों में मौजूद हैं। इलाके में घेराबंदी की स्थिति बन गई है और कानून-व्यवस्था नियंत्रण के लिए वज्र वाहन तक तैनात किए गए हैं।
हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणियां, शहर की छवि पर चिंता
मंगलवार को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार के जवाब को असंवेदनशील करार देते हुए तीखी टिप्पणियां कीं। कोर्ट ने कहा कि इस घटना ने इंदौर की छवि को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाया है। इंदौर को देश का सबसे स्वच्छ शहर माना जाता है, लेकिन अब दूषित पेयजल की वजह से यह पूरे भारत में चर्चा का विषय बन गया है। अदालत ने यह भी कहा कि जब पीने का पानी ही दूषित हो जाए तो यह अत्यंत गंभीर चिंता का विषय है।
पूरे शहर की पेयजल सुरक्षा पर सवाल
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह समस्या केवल शहर के एक हिस्से तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे इंदौर शहर के पीने के पानी की सुरक्षा संदिग्ध प्रतीत हो रही है। अदालत ने कहा कि वह इस मामले में मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव को सुनना चाहती है, क्योंकि मुद्दा व्यापक सार्वजनिक हित से जुड़ा है। कोर्ट ने मुख्य सचिव को अगली सुनवाई में वर्चुअली उपस्थित होने का निर्देश दिया है। अगली सुनवाई 15 जनवरी को निर्धारित की गई है।
मौतें, अस्पताल में भर्ती और नए मामले
दूषित पानी पीने से अब तक 17 लोगों की मौत हो चुकी है। अस्पतालों में इस समय 110 मरीज भर्ती हैं। अब तक कुल 421 मरीजों को अस्पतालों में भर्ती किया गया, जिनमें से 311 मरीजों को इलाज के बाद डिस्चार्ज किया जा चुका है। आईसीयू में 15 मरीजों का उपचार चल रहा है। उल्टी-दस्त के 38 नए मामले सामने आए हैं, जिनमें से 6 मरीजों को अरबिंदो अस्पताल रेफर किया गया है।
पहले के कोर्ट आदेश और वर्तमान स्थिति पर सवाल
याचिकाकर्ताओं की ओर से कोर्ट को बताया गया कि 31 दिसंबर 2025 को हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और नगर निगम को नागरिकों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। इसके अनुपालन में एक स्टेटस रिपोर्ट भी दाखिल की गई थी, लेकिन याचिकाकर्ताओं के वकील ने दलील दी कि प्रभावित क्षेत्र में अभी भी जो पानी सप्लाई हो रहा है, वह दूषित है और पीने योग्य नहीं है।
स्थानीय शिकायतों की अनदेखी और अधूरा इंफ्रास्ट्रक्चर
अन्य याचिकाओं के माध्यम से यह मुद्दा भी उठाया गया कि इस घटना से पहले स्थानीय निवासियों ने कई बार शिकायतें की थीं, लेकिन प्रशासन ने उन पर समय रहते कोई संज्ञान नहीं लिया। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि यदि शिकायतों पर उचित समय पर कार्रवाई और रोकथाम के कदम उठाए गए होते तो वर्तमान स्थिति उत्पन्न नहीं होती। वरिष्ठ अधिवक्ता ने यह भी बताया कि 2022 में महापौर ने पीने के पानी की आपूर्ति के लिए नई पाइपलाइन बिछाने का प्रस्ताव पारित किया था, लेकिन फंड जारी न होने के कारण अब तक यह काम शुरू नहीं हो सका।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड रिपोर्ट पर कार्रवाई न होने का आरोप
याचिकाकर्ताओं ने अदालत को यह भी जानकारी दी कि वर्ष 2017-18 में इंदौर के अलग-अलग क्षेत्रों से पानी के 60 नमूने लिए गए थे, जिनमें से 59 नमूने पीने योग्य नहीं पाए गए थे। यह रिपोर्ट मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की थी, लेकिन आरोप है कि इस रिपोर्ट के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। याचिकाकर्ताओं ने संबंधित अधिकारियों पर केवल नागरिक नहीं, बल्कि आपराधिक जिम्मेदारी भी तय करने की मांग की है और पूरे मामले की जांच के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित करने का अनुरोध किया है।
हाईकोर्ट के निर्देश और अधिकारों पर जोर
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और नगर निगम को निर्देश दिया है कि वे इस मामले में अपना विस्तृत जवाब दाखिल करें और एक नई स्टेटस रिपोर्ट पेश करें। अदालत ने स्पष्ट किया कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार में स्वच्छ पेयजल का अधिकार भी शामिल है। कोर्ट ने मामले से जुड़े मुद्दों को सात श्रेणियों में वर्गीकृत किया है, ताकि सुनवाई के दौरान प्रत्येक पहलू पर व्यवस्थित तरीके से विचार किया जा सके। आगामी सुनवाई में अदालत प्रशासनिक जवाबदेही और पेयजल सुरक्षा के उपायों पर विस्तृत समीक्षा करेगी।
Vivek Singh