मध्य प्रदेश वन विभाग में 8125 पद खाली, वन्यजीवों पर गहरा संकट
मध्य प्रदेश, जिसे 'टाइगर स्टेट' के रूप में जाना जाता है, वहां वन्यजीवों पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। राज्य के वन विभाग में 8,125 पद खाली पड़े हैं, जिसके कारण वन्यजीवों के संरक्षण और निगरानी में भारी कमी आ रही है। 31 मार्च की रिपोर्ट के अनुसार, कुल 26,079 स्वीकृत पदों में से 31 प्रतिशत पद रिक्त हैं। इस कमी का असर यह है कि वर्ष 2026 में अब तक 3 महीनों में 14 बाघों की मौत हो चुकी है, जबकि पिछले वर्ष 55 बाघों ने अपनी जान गंवाई थी। इनमें से आधे से अधिक मौतें शिकार या बिजली के करंट के कारण हुई हैं, जिसे वन अधिकारियों ने भी स्वीकार किया है।
अधिकारी स्तर से लेकर मैदानी कर्मचारियों तक की कमी
वन विभाग में भारतीय वन सेवा (IFS) और राज्य वन सेवा (SFS) के अधिकारियों के साथ-साथ मैदानी कर्मचारियों की भी भारी कमी है। भारतीय वन सेवा के कुल 296 स्वीकृत पदों में से 111 पद खाली हैं, जबकि केवल 185 अधिकारी ही कार्यरत हैं। इसी तरह, राज्य वन सेवा के 359 स्वीकृत पदों में से 215 पद रिक्त हैं, और 142 अधिकारी ही पदस्थ हैं।
विभिन्न स्तरों पर भी गंभीर रिक्तियां हैं। वन बल प्रमुख, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (PCCF), अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक (APCCF) और मुख्य वन संरक्षक (CCF) जैसे वरिष्ठ IFS पदों पर भी बड़ी संख्या में रिक्तियां हैं। उदाहरण के लिए, 25 APCCF पदों में से केवल 8 भरे हुए हैं, और 51 CCF पदों के विरुद्ध मात्र 8 अधिकारी कार्यरत हैं।
अधीनस्थ कार्यपालिक सेवाओं, जैसे वन रक्षक, वन पाल, उप वन क्षेत्र पाल और वन क्षेत्रपाल में भी कुल 20,676 पदों में से 5,452 पद रिक्त हैं। वन रक्षकों के 14,030 स्वीकृत पदों में से 1,351 पद, वन पाल के 4,194 में से 2,598 पद, और उप वन क्षेत्र पाल के 1,258 में से 930 पद खाली हैं। प्रशिक्षण के लिए आरक्षित 6 IFS पद भी पूरी तरह खाली हैं।
विभाग और विशेषज्ञों की राय
वन बल प्रमुख और पीसीसीएफ शुभरंजन सेन ने स्वीकार किया है कि विभाग में पद रिक्त हैं और इससे काम प्रभावित होता है। उन्होंने बताया कि फॉरेस्ट गार्ड के रिक्त पदों पर भर्ती की प्रक्रिया जारी है। कुछ पद पदोन्नति के कारण अटके हुए हैं, तो कुछ अन्य व्यवस्थाओं के चलते प्रभावित हैं, लेकिन उन्हें सही करने के प्रयास चल रहे हैं।
वन्यजीव विशेषज्ञ अजय दुबे ने इस स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि स्टाफ और अधिकारियों की कमी का सीधा असर वनों और वन्यजीवों की निगरानी, संरक्षण और कार्ययोजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से इस ओर तत्काल ध्यान देने और अधिकारियों तथा फील्ड स्टाफ की कमी को पूरा करने का आग्रह किया है ताकि 'टाइगर स्टेट' के वन्यजीव सुरक्षित रह सकें।
L. N. Bhargava