घने कोहरे से रेलवे-हाईवे प्रभावित, दिल्ली–MP ट्रेनें लेट, MP में कड़ाके की ठंड

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घने कोहरे से रेलवे-हाईवे प्रभावित, दिल्ली–MP ट्रेनें लेट, MP में कड़ाके की ठंड

मध्यप्रदेश में घना कोहरा और कड़ाके की ठंड, दिल्ली से आने वाली ट्रेनें घंटों देरी से

उत्तर भारत में बढ़ती सर्दी और घने कोहरे का सीधा असर दिल्ली से मध्यप्रदेश आने-जाने वाली ट्रेनों और सड़क यातायात पर दिखाई दे रहा है। राजधानी दिल्ली से मध्यप्रदेश के लिए चलने वाली 15 से अधिक ट्रेनें रोजाना लगभग 20 मिनट से लेकर 5 घंटे तक देरी से पहुंच रही हैं।

दिल्ली से आने वाली प्रमुख ट्रेनें प्रभावित

कोहरे के कारण दिल्ली रूट की कई महत्वपूर्ण ट्रेनें लेट चल रही हैं। इनमें शताब्दी, छत्तीसगढ़, राप्तीसागर, पातालकोट, कुशीनगर, सचखंड, अमृतसर–नांदेड़, मदुरई–चंडीगढ़, तमिलनाडु, केरल, भोपाल एक्सप्रेस और कर्नाटक संपर्क क्रांति जैसी ट्रेनों के समय पर असर पड़ा है। भोपाल रेलवे स्टेशन पर मालवा एक्सप्रेस भी लगातार देरी से पहुंच रही है। खराब मौसम और कोहरे के कारण अन्य रूट से इंदौर और उज्जैन पहुंचने वाली कई ट्रेनों की समय-सारिणी भी बिगड़ी हुई है।

12 जिलों में घने कोहरे का अलर्ट, कई जगह शीतलहर

मौसम विभाग ने गुरुवार के लिए मध्यप्रदेश के 12 जिलों में घने कोहरे का अलर्ट जारी किया है। इन जिलों में ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज और सीधी शामिल हैं। वहीं भोपाल, राजगढ़, शाजापुर, सीहोर और इंदौर में शीतलहर चलने की संभावना जताई गई है।

कई शहरों में बेहद कम विजिबिलिटी

बुधवार सुबह भोपाल और ग्वालियर सहित 22 जिलों में घना कोहरा छाया रहा, जिससे ट्रेन और फ्लाइट दोनों प्रभावित हुईं। ग्वालियर, नर्मदापुरम, उज्जैन, मंडला, रीवा और सतना में विजिबिलिटी 1 से 2 किलोमीटर के बीच दर्ज की गई। भोपाल, जबलपुर, खजुराहो, नौगांव, मलाजखंड, दतिया, गुना, इंदौर और रतलाम में 2 किलोमीटर के बाद दृश्यता बेहद सीमित रही। शाजापुर में स्थिति इतनी खराब रही कि 50 मीटर के बाद कुछ भी नजर नहीं आ रहा था। प्रशासन और विशेषज्ञों ने लोगों को वाहनों की गति नियंत्रित रखने और सावधानी से ड्राइविंग करने की सलाह दी है।

मंदसौर और शाजापुर सबसे ठंडे, कई शहरों में पारा लुढ़का

मंगलवार-बुधवार की रात प्रदेश के कई शहरों में न्यूनतम तापमान में तेज गिरावट दर्ज की गई। पांच बड़े शहरों में इंदौर का न्यूनतम तापमान 4.9 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सबसे कम था। भोपाल में 5.1 डिग्री, ग्वालियर में 9.8 डिग्री, उज्जैन में 8 डिग्री और जबलपुर में 8.6 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज हुआ।

मंदसौर पूरे प्रदेश में सबसे ठंडा शहर रहा, जहां न्यूनतम तापमान 3.7 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। शाजापुर में पारा 3.8 डिग्री रहा। इसके अलावा राजगढ़ में 4.4 डिग्री, पचमढ़ी और नौगांव में 5.4 डिग्री, उमरिया और मलाजखंड में 5.6 डिग्री, रायसेन में 6.6 डिग्री, छिंदवाड़ा में 6.8 डिग्री, रीवा में 7 डिग्री, मंडला में 8.1 डिग्री, खंडवा और सतना में 8.4 डिग्री, दमोह और बैतूल में 8.5 डिग्री, नरसिंहपुर में 8.6 डिग्री, खजुराहो, रतलाम और गुना में 9.6 डिग्री तथा दतिया में 9.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

लोगों को सुरक्षित ड्राइविंग और स्वास्थ्य के लिए सलाह

प्रदेश के कई हिस्सों में सुबह के समय घने कोहरे की स्थिति बन रही है। मौसम विभाग और विशेषज्ञों ने लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। वाहन चलाते समय हेडलाइट और फॉगलाइट का सही उपयोग, गति कम रखने और पर्याप्त दूरी बनाए रखने पर जोर दिया गया है। विभाग ने स्वास्थ्य और फसलों पर ठंड और कोहरे के संभावित असर के संबंध में एडवाइजरी भी जारी की है।

19 दिसंबर से नया पश्चिमी विक्षोभ, ठंड और बढ़ने के आसार

मौसम विभाग के अनुसार, 19 दिसंबर से नया पश्चिमी विक्षोभ पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र को प्रभावित करेगा। इसके असर से अगले दो-तीन दिनों में मध्यप्रदेश में ठंड और बढ़ने की संभावना है। वर्तमान सिस्टम के पीछे एक और पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने की तैयारी में है, जिससे शीतलहर और अधिक तेज हो सकती है।

जेट स्ट्रीम की तेज रफ्तार भी बढ़ा रही सर्दी

प्रदेश में ठंड बढ़ाने में जेट स्ट्रीम की भूमिका भी अहम बताई जा रही है। यह लगभग 12 किलोमीटर ऊंचाई पर बहने वाली तेज हवाओं की धारा है। उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में जेट स्ट्रीम सक्रिय है और बुधवार को यह जमीन से 12.6 किलोमीटर की ऊंचाई पर करीब 185 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से बहती रही। हाल के दिनों में इसकी रफ्तार 222 किलोमीटर प्रति घंटा तक दर्ज की गई है।

मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, पहाड़ों से आने वाली बर्फीली हवाओं के साथ जब उत्तर भारत के मैदानी इलाकों से ठंडी हवा मध्यप्रदेश की ओर बढ़ती है, तो तापमान में तेज गिरावट आती है। इस प्रक्रिया में पश्चिमी विक्षोभ महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, और यदि साथ में जेट स्ट्रीम भी सक्रिय हो जाए, तो सर्दी का प्रभाव और अधिक बढ़ जाता है।

नवंबर में रिकॉर्ड तोड़ ठंड, दिसंबर-जनवरी सबसे अहम

इस सीजन में नवंबर में ही ठंड ने कई पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए। भोपाल में लगातार 15 दिन तक शीतलहर चलती रही, जो 1931 के बाद सबसे लंबा शीतलहर का दौर है। 17 नवंबर की रात को शहर में न्यूनतम तापमान 5.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ, जो अब तक का समग्र रिकॉर्ड है। इससे पहले 30 नवंबर 1941 को तापमान 6.1 डिग्री तक पहुंचा था। इंदौर में भी इस बार पारा 6.4 डिग्री तक गिरा, जो पिछले 25 साल में सबसे कम रिकॉर्ड में शामिल है।

मौसम विभाग के अनुसार, जिस तरह मानसून के चार महीनों में जुलाई और अगस्त सबसे ज्यादा बारिश वाले माने जाते हैं, उसी तरह दिसंबर और जनवरी कड़ाके की ठंड वाले मुख्य महीने होते हैं। इन दो महीनों में उत्तर भारत से सर्द हवाओं का दबाव सबसे अधिक रहता है, जिससे तापमान में तेज गिरावट और शीतलहर की स्थिति बनती है। पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय रहने पर दिसंबर में बूंदाबांदी (मावठा) भी होती है, जिससे दिन के तापमान में भी कमी आती है।

दिसंबर–जनवरी में लंबा कोल्ड वेव पीरियड संभव

मौसम विशेषज्ञों का अनुमान है कि दिसंबर में प्रदेश के कई शहरों में ठंडी हवाओं का दौर जारी रहेगा और जनवरी में कोल्ड वेव 20 से 22 दिन तक चल सकती है। इसके पीछे ला नीना की स्थिति, पहाड़ियों पर जल्दी शुरू हुई बर्फबारी, ठंडी हवाओं का अधिक अंदर तक पहुंचना और पश्चिमी विक्षोभ का लगातार सक्रिय रहना प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं।

भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर और उज्जैन में ठंड और बारिश का इतिहास

भोपाल

भोपाल में दिसंबर में ठंड के साथ हल्की से मध्यम बारिश का दौर देखने को मिलता रहा है। पिछले 10 वर्षों में से 5 साल ऐसे रहे, जब दिसंबर में आधा से तीन-चौथाई इंच तक बारिश दर्ज की गई। यहां 11 दिसंबर 1966 की रात को न्यूनतम तापमान 3.1 डिग्री सेल्सियस तक गिरा, जो अब तक का समग्र रिकॉर्ड है। वर्ष 2021 में दिसंबर के दौरान पारा 3.4 डिग्री तक पहुंच चुका है।

इंदौर

इंदौर में दिसंबर के दौरान रात का तापमान आमतौर पर 5 से 8 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है। पिछले साल न्यूनतम तापमान 8.6 डिग्री दर्ज किया गया। पिछले 10 साल के आंकड़ों के अनुसार, दिन का अधिकतम तापमान 28 से 31 डिग्री के बीच रहता है। दिसंबर में यहां बारिश का भी ट्रेंड है और पिछले चार साल से लगातार बारिश दर्ज की जा रही है। 31 दिसंबर 2015 को दिन का अधिकतम तापमान 33 डिग्री तक पहुंचा, जबकि 27 दिसंबर 1936 की रात में न्यूनतम तापमान 1.1 डिग्री दर्ज होने का रिकॉर्ड मौजूद है। वर्ष 1967 में दिसंबर की कुल मासिक बारिश 108.5 मिमी (लगभग 4.2 इंच) रही, जबकि 17 दिसंबर 2009 को 24 घंटे में 53 मिमी (करीब 2.1 इंच) बारिश हुई।

ग्वालियर

ग्वालियर में दिसंबर के दौरान दिन में हल्की गर्माहट और रात में कड़ाके की ठंड का मिश्रित असर रहता है। पिछले 10 साल में यहां अधिकतम तापमान 26.2 से 31.6 डिग्री के बीच दर्ज हुआ है, जबकि रात का तापमान 1.8 से 6.9 डिग्री के दायरे में रहा। 6 दिसंबर 2006 को दिन का तापमान 32.1 डिग्री तक पहुंचा था। 26 दिसंबर 1961 को न्यूनतम तापमान 0.4 डिग्री दर्ज हुआ, जो प्रमुख रिकॉर्ड में शामिल है। वर्ष 1997 में 106.6 मिमी (लगभग 4.1 इंच) मासिक बारिश और 13 दिसंबर 2013 को 24 घंटे में 32.1 मिमी (करीब 1.2 इंच) बारिश का रिकॉर्ड है।

जबलपुर

जबलपुर में भी दिसंबर में ठंड के साथ बारिश होने का इतिहास रहा है। 28 दिसंबर 1960 को दिन का तापमान 33.2 डिग्री सेल्सियस तक गया, जबकि 28 दिसंबर 1902 की रात को न्यूनतम तापमान 0.6 डिग्री दर्ज हुआ, जो यहां का समग्र रिकॉर्ड माना जाता है। वर्ष 1885 में दिसंबर की कुल मासिक बारिश 125 मिमी (करीब 4.9 इंच) रही, और 16 दिसंबर 1885 को 24 घंटे में 68.1 मिमी (लगभग 2.6 इंच) बारिश दर्ज की गई।

उज्जैन

उज्जैन में दिसंबर के दौरान दिन का औसत तापमान 28.2 डिग्री और रात का औसत 9.4 डिग्री सेल्सियस रहता है। इस महीने औसतन 4.6 मिमी बारिश दर्ज की जाती है और पिछले पांच साल से हर दिसंबर में बारिश हो रही है। 18 दिसंबर 2002 को दिन का तापमान 34.9 डिग्री तक पहुंचा, जो रिकॉर्ड है। 28 दिसंबर 1968 और 29 दिसंबर 1983 को रात के समय न्यूनतम तापमान 0.5 डिग्री तक गिरा। वर्ष 1997 में मासिक बारिश 119.4 मिमी (करीब 4.7 इंच) रही, जबकि 11 दिसंबर 1967 को 24 घंटे में 35.3 मिमी (लगभग 1.3 इंच) बारिश दर्ज की गई।

निष्कर्ष: आने वाले दिनों में और बढ़ सकती है ठंड

कुल मिलाकर, घने कोहरे, गिरते तापमान, सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ और तेज जेट स्ट्रीम के संयुक्त प्रभाव के कारण मध्यप्रदेश में सर्दी का प्रकोप बढ़ा हुआ है। ट्रेन और उड़ान सेवाएं प्रभावित हैं, कई जिलों में घने कोहरे और शीतलहर के अलर्ट जारी हैं, और अनुमान है कि दिसंबर के अंत से जनवरी तक ठंड का यह दौर और तेज हो सकता है। मौसम विभाग ने लोगों से सावधानी बरतने, यात्रा के दौरान अतिरिक्त समय रखने और ठंड से बचाव के उपाय करने की अपील की है।

L. N. Bhargava